हरियाणा की 73 साल की दादी का स्टंट वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर छाया है। दादी का नाम ओमपति है। वहीं हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव बंदेपुर की रहने वाली हैं। हरिद्वार में हरकी पैड़ी स्थित पुल से गंगा में छलांग लगाते 73 वर्षीय दादी का स्टंट सोशल मीडिया पर वायरल है। वह गंगा स्नान करने हरिद्वार पहुंची थीं। पुल से युवाओं को गंगा में छलांग लगाते देख दादी भी जोश में आ गईं। दादी ने उफनती गंगा में 40 फुट की ऊंचाई से छलांग लगा दी और तैरकर आसानी से घाट पर पहुंच गई। दादी रातो-रात सोशल मीडिया पर देश की नई सनसनी बन गईं। ओमपति ने यह कारनामा पहली बार नहीं किया है, वह जब कभी भी हरिद्वार जाती हैं तो पुल से गंगा में छलांग लगाना नहीं भूलती।
गंगा में छलांग लगाने वाली दादी की कहानी: तैरने में माहिर हैं, घी-दूध खाया...दोनों घुटनों का हो चुका ऑपरेशन, मगर जज्बे में कमी नहीं
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उम्र के जिस पड़ाव में आकर बुजुर्ग चारपाई पकड़ लेते हैं, बीमारियों से घिर जाते हैं, उस उम्र में भी गांव बंदेपुर निवासी ओमपति में गजब का जोश व जुनून है। बेखौफ व निडर होकर जीवन जीने वाली ओमपति ने अपनी सेहत का राज बताते हुए कहा कि हरियाणा के देसी खाने से उन्हें यह ताकत मिली है। बचपन से ही खूब घी-दूध खाया-पिया है। आज भी पौष्टिक आहार ही लेती हूं। घी-दूध के साथ फल खाती हूं और जूस पीती हूं। ओमपति बताती हैं कि सुबह जल्दी उठना, प्रात: कालीन भ्रमण पर जाना, नहाना, पूजा-पाठ करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। यही कारण है कि आज भी शरीर में पहले जैसी ताकत बरकरार है। ओमपति कहती हैं कि आज के युवा फास्ट फूड तक सीमित हैं। पौष्टिक आहार उन्हें भाता नहीं है। यही कारण है कि युवाओं से आज भी डबल ताकत रखती हूं।
युवाओं को छलांग लगाते देख जागी इच्छा
ओमपति मूलरूप से बहादुरगढ़ के गांव जसौरखेड़ी की रहने वाली हैं। फिलहाल ओमपति परिवार के साथ सोनीपत के गांव बंदेपुर में रह रही हैं। ओमपति के पति राजेंद्र सिंह देसवाल आर्मी से सेवानिवृत्त हैं। इनके दो बेटे अशोक व धर्मबीर हैं। दोनों चालक हैं और दोनों के तीन-तीन बच्चे हैं। गत दिनों ओमपति परिवार के साथ हरिद्वार गई थीं, जहां युवाओं को पुल के ऊपर से गंगा में छलांग लगाते देखकर उनके मन में भी गंगा में छलांग लगाने की इच्छा हुई। वे पुल पर पहुंचीं और वहां मौजूद लोगों से कहा कि उसे तैरना आता है लेकिन कोई भी युवा या व्यक्ति देखकर नदी में छलांग लगाकर अपना जीवन खतरे में ना डाले। लोगों को सीख देने के साथ ही ओमपति ने गंगा में छलांग लगा दी और उफनती गंगा को तैरकर पार भी कर लिया।
घुटनों का हो चुका ऑपरेशन
ओमपति के घुटनों का ऑपरेशन हो चुका है। ओमपति की पोती रेनू ने बताया कि कुछ साल पहले दादी सड़क दुर्घटना में घायल हो गई थीं। उनके दोनों घुटनों का ऑपरेशन हुआ है। उसके बावजूद वह हमेशा अपना काम स्वयं करने में विश्वास रखती हैं। वे कभी नहीं डरती और हमें हमेशा सक्रिय (एक्टिव) रहने के लिए प्रेरित करती हैं। रेनू ने बताया कि दादी को नाचने-गाने का भी शौक है। जिसे पूरा करने में आज भी पीछे नहीं हटती। उनके खाने में दूध, दही और घी जरूर होता है।
रेनू बताती हैं कि उन्हें सुनाई देना जरूर कम हो गया है लेकिन आज भी हर काम को फूर्ती के साथ करती हैं। रेनू बताती हैं कि हाथ की चक्की चलाने से लेकर पशुओं का चारा लाने व काटने तक का कार्य दादी बड़ी सहजता से कर लेती हैं। दादी अपनी दिनचर्या के साथ ही दिन में हुक्का गुड़गुड़ाना नहीं भूलती। अपनी दादी को देख हम भी बहुत कुछ सीख रहे हैं।