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किसान आंदोलन : रोजाना पांच लाख आने वाला चंदा ढाई लाख घटा, सवाल उठे तो किसान मोर्चे ने दिया हिसाब

Mon, 01 Mar 2021 06:36 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 01 Mar 2021 06:36 PM IST
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Kisan Andolan News: Donation Contribution decreased in Kisan Andolan
किसान आंदोलन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

किसान आंदोलन में आने वाले चंदे और खर्च पर लगातार सवाल उठने के बाद संयुक्त किसान मोर्चे ने कुंडली बॉर्डर पर पूरा हिसाब सार्वजनिक किया। आंदोलन के दौरान अभी तक 4694 लोगों ने करीब पांच करोड़ रुपये का चंदा दिया है। इसमें से सबसे अधिक करीब 60 लाख रुपये बीमार लोगों के उपचार पर खर्च हुए हैं। मोर्चे के अनुसार पहले के मुकाबले अब प्रतिदिन मिलने वाला अंशदान आधा रह गया है। पहले जहां हर दिन पांच लाख का चंदा मिल रहा था अब यह राशि ढाई लाख तक ही रह गई है।

Kisan Andolan News: Donation Contribution decreased in Kisan Andolan
किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

किसान आंदोलन की शुरुआत में जैसे भीड़ बढ़नी शुरू हुई थी उसी तरह से खूब चंदा भी आना शुरू हो गया था। आंदोलन में आने वाले चंदे का ब्योरा रखने के लिए संयुक्त किसान मोर्चे ने सात सदस्यों की कमेटी गठित की है। कमेटी के संयोजक भाकियू कादियान के अध्यक्ष अमरीक सिंह को बनाया गया है। अमरीक सिंह ने बताया कि जब कोई चंदा देने आता है तो उसकी रसीद काटी जाती है, जिस पर उसके मोबाइल नंबर के साथ पूरी जानकारी दर्ज होती है।

Kisan Andolan News: Donation Contribution decreased in Kisan Andolan
किसान आंदोलन की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

किसी को यदि कोई शक है तो उस मोबाइल नंबर पर फोन कर पूछताछ कर सकता है। रसीद कटने के साथ ही वह मंच पर जाती है और वहां इसकी घोषणा होती है। लोगों ने 50 रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का अंशदान किया है। अभी तक 4694 लोगों ने करीब पांच करोड़ रुपये का चंदा आंदोलन के लिए दिया है। हालांकि पहले के मुकाबले आंदोलन के लिए आने वाला चंदा काफी कम हो गया है। 

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कुंडली बॉर्डर पर बैठीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

कमेटी करेगी चंदा आने से लेकर खर्च तक की जांच
अमरीक सिंह ने बताया कि आंदोलन के दौरान किसी भी बॉर्डर पर जब कोई बीमार पड़ जाता है तो उसके अस्पताल के बिल आने पर भुगतान किया जाता है। दुर्घटना में ट्रैक्टर या गाड़ी क्षतिग्रस्त हो जाती है तो उसका भुगतान भी मोर्चे ने किया है। करीब 40 लाख रुपये तिरपाल पर खर्च हुए हैं और कई लाख रुपये कंबलों पर खर्च हुए हैं।

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किसान आंदोलन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के घर जाकर भी संयुक्त किसान मोर्चे की ओर से आर्थिक मदद की गई है। जो लोग रह गए हैं, उन सभी को आंदोलन खत्म होने के बाद बचा हुआ रुपया दिया जाएगा। इस तरह खर्च और चंदे का पूरा ब्योरा कुंडली बॉर्डर पर मंच से दिया गया। साथ ही कहा कि कोई भी चंदा आने से लेकर खर्च की जानकारी ले सकता है। अमरीक सिंह ने बताया कि सात सदस्यीय कमेटी चंदा आने से लेकर खर्च तक की जांच करेगी।

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