किसान आंदोलन में मानवता की मिसाल भी देखने को मिल रही है। जहां किसानों का बैरिकेड तोड़ने के साथ ही पुलिस के साथ झड़प में उग्र रूप दिखाई दे रहा है। वहीं ट्रक चालकों की मदद के लिए खूब दरियादिली दिखा रहे हैं। किसान जहां अपने लिए खाना बना रहे हैं। वहीं भूखे ट्रक चालकों के लिए भी खुद खाना बनाकर खिला रहे हैं।
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लंगर तैयार करतीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
नेशनल हाईवे 44 पर सिंघु बॉर्डर के पास ऐसा कई जगह दिखाई दिया, जहां ट्रक चालकों को उन्होंने खाना खिलाया। एनएच 44 पर किसान आंदोलन के कारण अधिकतर ढाबे बंद हो गए हैं और ट्रक जाम में फंसे होने के कारण चालकों को खाना नहीं मिल रहा है। ऐसे ही लुधियाना से ट्रक लेकर चालक पाली कई दिन पहले दिल्ली के लिए चले थे लेकिन वे जाम में फंस गए और वह एक दिन भूखे रहे। जब उनको किसानों ने भूखा देखा तो उनको खाना खिलाया।
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लंगर तैयार करते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
मोहाली के करमजीत सिंह ने बताया कि वह अपने साथियों के संग मिलकर खाना बनाते हैं और उनके साथ कोई भी खाना खा सकता है। क्योंकि वह किसी को भूखा नहीं रहने देना चाहते हैं। उनको कई ट्रक चालक भूखे दिखाई दिए तो उनको खाना खिलाया और उनके यहां कई ट्रक चालक खाना खाते हैं। इस तरह ही अन्य कई किसानों ने ट्रक चालकों को खाना खिलाना शुरू कर दिया है।
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ताश खेलते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
खुद ही कढ़ी-चावल और दाल-रोटी बना रहे
किसान केवल खेती ही नहीं करते हैं, बल्कि वह हर काम में पूरी तरह से पारंगत हैं। सिंघु बॉर्डर पर किसान खुद ही खाना बनाते हैं। किसान कढ़ी-चावल से लेकर दाल-रोटी बना रहे हैं तो वे दिन में नमकीन चावल भी बनाते हैं। इसके अलावा पकौड़े, चाय सब कुछ बनाने में किसान पारंगत हैं। जिन किसानों के कपड़े मैले हो गए हैं और उनके पास अन्य कपड़े नहीं बचे हैं, वे दिन में कपड़े धोकर उनको सुखा देते हैं।
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ट्रक चालकों को खाना खिलाते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
खाली समय में बैठकर किसान एक साथ हुक्का गुड़गुड़ाते हैं और ताश खेलते हैं। इस तरह से किसानों का दिन आराम से बीत रहा है। किसान रणजीत सिंह कहते हैं कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानेगी, तब तक आंदोलन ऐसे ही चलता रहेगा।