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पाकिस्तानी जेल में मिले दर्द पर गीत बनाता रहा कश्मीरी युवक

Thu, 10 Mar 2016 06:53 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 10 Mar 2016 06:53 PM IST
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kashmiri man who was prisoner in pakistan written poem on indian nationalism
पाकिस्तानी जेल में कश्मीरी युवक - फोटो : amar ujala

गलती से पाकिस्तान पहुंचे कश्मीरी युवक को वहां की जेल में जो दर्द मिला, वो उसे भारत माता के गीतों में पिरोता रहा। अब वो रिहा हो गया है।

पाक जेल में बंद कश्‍मीरी युवक बनाता रहा गीत

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पाकिस्तानी जेल में कश्मीरी युवक - फोटो : amar ujala

कश्मीर के बारामूला इलाके का रहने वाला 32 वर्षीय इनायत 86 भारतीय मछुआरों के साथ भारत लौटा है। साल 2011 में सउदी अरब जाने के चक्कर में यह युवक पाकिस्तान चला गया था और उसे भारतीय जासूस समझ कर पकड़ लिया गया। वो 5 साल तक पाकिस्तानी जेलों में रहा। पाकिस्तान में उसे कभी लांडी, कभी कोटलखपत तो कभी किसी अन्य जेल में भेज दिया जाता था।

पाक जेल में बंद कश्‍मीरी युवक

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पाकिस्तानी जेल में कश्मीरी युवक - फोटो : अमर उजाला

इनायत कहता है कि परिवार में उसके दो छोटे भाई, एक बड़ी बहन और पिताजी हैं। मां का निधन हो चुका है। यही कारण रहा कि वह पैसे कमाने के चक्कर में सरहद पार चला गया। उसके बनाए गीतों में 'दिल्ली मेरा दिल है, सिर मेरा कश्मीर, रगों में मेरी कल-कल करता गंगा-यमुना नीर... तथा 'है वतन ईमान मेरा इसपे सब कुर्बान, मैं हूं मुस्लिम-हिंद का वतन मेरा भगवान...। जैसे दर्जनों गीत शामिल हैं।

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पाकिस्तानी जेल में कश्मीरी युवक

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पाकिस्तानी जेल में कश्मीरी युवक - फोटो : अमर उजाला
इनायत बताते हैं कि जासूसी के आरोप में फंसने के चलते जेलों में अक्सर उसके साथ मारपीट की जाती रही। जख्मों में दर्द होता और देश या घरवालों की याद आती तो हालात को कोसने की बजाय उन शब्दों को गीतों की शक्ल में ढालता।
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पा‌किस्‍तान जेल में बंद कश्‍ममीरी युवक

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पा‌किस्‍तान जेल में बंद कश्‍ममीरी युवक - फोटो : अमर उजाला

जेल में कागज कलम रखने पर मनाही थी, जिस कारण रची गई लाइनों को बार-बार रटता। एक याद होने पर दूसरी शुरू कर देता। इस काम में वह रोजाना चार घंटे लगाता। इस तरह से उसने 35 गीत तैयार किए। अपने इस हुनर से कश्मीरी युवकों में वतनपरस्ती की अलख जगाएगा।

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