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दावाः इतिहास की सबसे बड़ी खोज, जापान लाने जा रहा पहला कृत्रिम मानव मस्तिष्क

Fri, 29 Nov 2019 01:42 AM IST
ajay kumar सुरेंद्र दलाल, अमर उजाला, महेंद्रगढ़ (हरियाणा)
सुरेंद्र दलाल, अमर उजाला, महेंद्रगढ़ (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Fri, 29 Nov 2019 01:42 AM IST
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Japan will bring world's first artificial human brain
सांकेतिक तस्वीर

अगले कुछ महीने में कृत्रिम मानव मस्तिष्क दुनिया के सामने आने वाला है। करीब 15 साल की रिसर्च अब पूरी होने के कगार पर है। जापान ने इसके लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। मानव प्रजाति के इतिहास में यह सबसे बड़ा अनुसंधान होगा। ये दावा जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मैटिरियल साइंस में मानव मस्तिष्क निर्माण कार्य से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. अनिरबन बंध्योपध्याय ने किया। उनका कहना है कि कृत्रिम मस्तिष्क को मानव मस्तिष्क की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह एक नेचुरल इंटेलीजेंस होगा। 

Japan will bring world's first artificial human brain
सांकेतिक तस्वीर

 उनका दावा है कि मानव मस्तिष्क तैयार कर लेना अब तक की सबसे बड़ी रिसर्च होगी। दुनिया में सबसे बड़ी सुपर पावर मानव मस्तिष्क है। अब हम मानव मस्तिष्क तैयार करने में कामयाब हो गए हैं। मूल रूप से भारतीय डॉ. अनिरबन बंध्योपध्याय ने बताया कि दुनिया भर में 16 देश मानव मस्तिष्क तैयार करने पर रिसर्च कर रहे हैं। जिसमें चीन, यूरोप, जापान सबसे अधिक पैसा खर्च कर रहे हैं। गूगल ने भी 2014 में मानव मस्तिष्क तैयार करने का एलान किया था। कृत्रिम मस्तिष्क अब तक रोबोट में ही उपयोग किया जाता है। जिसमें प्रोग्रामिंग कोडिंग होती है।

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सांकेतिक तस्वीर

वह कुछ चुनिंदा सवालों के जवाब ही दे सकता है तो उसमें डाले गए हों। अब नेचुरल माइंड तैयार हो गया है। जिसमें प्रोग्राम कोडिंग नहीं होगी। डॉ. अनिरबन ने कहा कि मानव का दिमाग हमेशा विकसित होता रहता है। जिस तरह से हमारे शरीर में लगातार बदलाव होते हैं। उसी तरह से हमारे मस्तिष्क में भी बदलाव आते रहते हैं। डॉ. अनिरबन ने कहा कि वो वर्ष 2005 तक कोलकाता के इंडियन एसोसिएशन फोर दि कल्टीवेशन साइंस में काम कर रहे थे। जापान ने इंटरनेशनल प्रतियोगिता के जरिए उनका चयन हयूमन ब्रेन तैयार करने के प्रोजेक्ट के लिए किया।

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सांकेतिक तस्वीर

जब तक वह जापान पहुंचे उनकी जरूरत के अनुसार वर्ल्ड क्लास लैब तैयार की जा चुकी थी। पिछले 15 साल में प्रोजेक्ट को लगभग पूरा कर चुके हैं। जल्द ही ह्यूमन माइंड का फर्स्ट वर्जन दुनिया के सामने आने वाला है। जिससे हम बातचीत कर सकेंगे। इसके लिए लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। गूगल, यूरोपीय देशों ने जो माइंड विकसित किया है उसे चलाने के लिए करीब 1200 मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ रही है। जो दो न्यूक्लियर पावर हाउस से मिलेगी। नेचुरल माइंड 20 वाट के हिसाब से एनर्जी उपयोग करता है। जापान की रिसर्च में भी इसी ऊर्जा क्षमता वाले माइंड को तैयार करने के प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। इतनी ऊर्जा घर में छोटे बल्ब को जलाने पर खर्च होती है।

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सांकेतिक तस्वीर

क्या होगा फायदा
एक सवाल के जवाब में डॉ. अनिरबन ने कहा कृत्रिम मस्तिष्क मानव के लिए खतरा नहीं होगा। यह मानव के हित में साबित होगा। ब्रेन डेड, कोमा की स्थिति में पहुंच चुके लोगों में इस तरह के माइंड का उपयोग किया जा सकेगा। इस तरह का माइंड कई साल बाद होने वाली बीमारी की जानकारी पहले ही दे देगा। जिससे भविष्य में होने वाली बीमारियों को होने से पहले ही रोका जा सकेगा। डॉ. अनिरबन ने कहा आज के समय में विकसित देश हथियारों पर रिसर्च से अधिक पैसा इस रिसर्च पर खर्च हो रहा है। वर्ल्ड के टॉप 16 देश इसमें रिसर्च कर रहे हैं। भारत इस प्रोजेक्ट में शामिल नहीं है। यूएस ने अपने इस प्रोजेक्ट को ओसामा इनेसेटिव नाम दिया हुआ है।

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