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आपकी रोलेक्स घड़ी आपको धोखा दे सकती है, लेकिन फ्रंटियर मेल नहीं...92 साल की हो गई है

Wed, 02 Sep 2020 12:50 PM IST
खुशबू गोयल अनिल कुमार, फिरोजपुर
अनिल कुमार, फिरोजपुर Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 02 Sep 2020 12:50 PM IST
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Indian Railways, Golden Temple Mail Completes 92 Year
स्वर्ण मंदिर मेल - फोटो : फाइल फोटो
कहा जाता था कि आपकी रोलेक्स घड़ी आपको धोखा दे सकती है, लेकिन फ्रंटियर मेल नहीं और आज ये ट्रेन 92 साल की हो चुकी है। जानिए इसकी खासियतें...
Indian Railways, Golden Temple Mail Completes 92 Year
स्वर्ण मंदिर मेल - फोटो : फाइल फोटो
रेल पटरी पर दौड़ते हुए गोल्डन टेम्पल मेल को एक सितंबर को 92 साल हो चुके हैं। ये ट्रेन वर्ष 1928 से संचालित हो रही है। पहले इसका नाम फ्रंटियर मेल था। वर्ष 1996 में इसे गोल्डन टेंपल मेल नाम दिया गया। इस ट्रेन में वर्ष 1934 में वातानुकूलित कोच जोड़ा गया था, जिसे बर्फ की सिल्लियों से ठंडा किया जाता था। कोच गर्म न हो, इसके लिए बर्फ की सिल्लियां किस स्टेशन पर बदली जाएंगी वो पहले से निर्धारित था।
Indian Railways, Golden Temple Mail Completes 92 Year
स्वर्ण मंदिर मेल - फोटो : फाइल फोटो
रेल डिवीजन फिरोजपुर के डीआरएम राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारतीय रेलवे की सबसे पुरानी लंबी दूरी की ट्रेनों में से एक गोल्डन टेम्पल मेल है। फिरोजपुर मंडल के हैरिटेज अधिकारी एसपी सिंह भाटिया ने बताया कि इसका उद्घाटन एक सितंबर 1928 को हुआ था। शुरुआत में यह ट्रेन बॉलार्ड पियर मोल स्टेशन से दिल्ली, बठिंडा, फिरोजपुर, लाहौर होते हुए पेशावर (पाकिस्तान) तक जाती थी। एक मार्च 1930 से यह सहारनपुर, अंबाला, अमृतसर होते हुए पेशावर जाने लगी। 1947 में विभाजन के बाद इस ट्रेन का टर्मिनल स्टेशन अमृतसर बनाया गया। फ्रंटियर मेल को औपचारिक रूप से सितंबर 1996 में ‘गोल्डन टेंपल मेल’ का नाम दिया गया।
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Indian Railways, Golden Temple Mail Completes 92 Year
स्वर्ण मंदिर मेल - फोटो : फाइल फोटो
वर्ष 1930 में लंदन के प्रमुख अखबार ‘द टाइम्स’ ने फ्रंटियर मेल को ब्रिटिश साम्राज्य की सबसे प्रसिद्ध एक्सप्रेस ट्रेनों में से एक बताया था। फ्रंटियर मेल के प्रथम श्रेणी में सफर करने वाले अधिकतर लोग ब्रिटिश होते थे। उनकी सुविधा के लिए ट्रेन में आरक्षण, स्टीमर की बुकिंग लंदन में होती थी। आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन के प्रथम श्रेणी के प्रत्येक डिब्बों में शौचालय, बाथरूम, विशेष रूप से निर्मित बर्थ एवं दिन के लिए आरामदायक कुर्सियां लगी हुई थी। पूरे कोच में पंखे और लाइट लगे हुए थे। फ्रंटियर मेल अपनी समय निष्ठा के लिए जानी जाती थी। यह कहा जाता था कि आपकी रोलेक्स घड़ी आपको धोखा दे सकती है, लेकिन फ्रंटियर मेल नहीं।
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Indian Railways, Golden Temple Mail Completes 92 Year
स्वर्ण मंदिर मेल - फोटो : फाइल फोटो
फ्रंटियर मेल भारतीय प्रायद्वीप की पहली ट्रेन थी, जिसमें 1934 में वातानुकूलित कोच लगाया गया था। उन दिनों वातानुकूलित प्रणाली में बर्फ की सिल्लियां कोच के नीचे बने ब्लॉक में रखकर, एक बैटरी संचालित ब्लोअर से हवा की जाती थी। इससे पूरे कोच में ठंडक का अनुभव होता था। बर्फ की सिल्लियों को नियमित अंतराल पर पुन: रखा जाता था। यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण समाचारों से अवगत कराने के लिए बॉम्बे बड़ौदा एंड सेंट्रल इंडिया रेलवे कंपनी ने लंदन के प्रमुख समाचार पत्र ‘राइटर’ के साथ समझौता किया था।
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