ट्रेन में हर रोज सफर करने वाले लोग ध्यान दें, ये बेहद जरूरी जानकारी आपके लिए है। जानने के लिए क्लिक करें, बड़े काम आएगी।
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर यह मामला देखने में आया। यहां ट्रेवल एजेंटों की चांदी है। जो बिना रोक-टोक के रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को आए दिन परेशान करते हैं। जैसे हीं दूसरे स्टेशनों से आने वाली ट्रेन चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर आकर खड़ी होती है, ट्रेवल एजेंट प्लेटफार्म पर आ धमकते हैं और जिसके बाद शुरू होता है यात्रियों को अपने जाल में फंसाना।
इन एजेंटों का जाल इतना लंबा है कि टिकट बुकिंग काउंटर से लेकर ट्रेन के कोच तक यात्रियों से ट्रैवल के नाम पर एजेंट मनमाने तरीके से पैसे वसूल करते हैं। खासकर हिमाचल की वादियों में गर्मी के दिनों में सैर के लिए आने वाले सैलानी इनके झांसे में आसानी से फंस जाते हैं। क्योंकि वे इन एजेंटों के हकीकत से परे है। यात्रियों की शिकायत पर अमर उजाला के संवाददाता ने रियलिटी चेक किया।
इसमें पाया कि लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर जैसे ही रुकी एजेंट प्लेटफार्म के एक से दूसरे छोर तक फैल गए और ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को घेरने और अपनी बातों में फंसाने में जुट गए। खुद रिपोर्टर से भी एजेंट ने पूछा कि शिमला जाना है, तो बताइए और पंपलेट दिखाने लगा। रिपोर्टर ने जैसे ही मना किया दूसरे यात्री को एजेंट ने पकड़ लिया।
बता दें कि ट्रेवल एजेंटों का नेटवर्क चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से महज पांच सौ मीटर की दूरी पर दड़वा से जुड़ा है, जहां ट्रैवल कंपनियों के करीब 11 कार्यालय हैं, जिनके 30 से 35 गुर्गे रेलवे स्टेशन यात्रियों को अपनी जाल में फंसाने में जुटे रहते हैं। अगर आप चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर कुछ देर इधर-उधर घूमते दिख गए तो जीआरपी से लेकर आरपीएफ तक आपसे सवाल करने लगेंगे।