फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जयंती विशेषः कहानी उस 'शेर' की जो अनाथालय में पला-बढ़ा, 21 साल बाद दुश्मन को घर में घुसकर मारा

Wed, 26 Dec 2018 11:46 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 26 Dec 2018 11:46 AM IST
विज्ञापन
Indian Freedom Fighter Shaheed Udham Singh jayanti
उधम सिंह - फोटो : self

आज भारत मां के उस वीर सपूत की जयंती है, जिसने दुश्मन को उसी के घर में घुसकर मारा। अंग्रेजों में जिनके नाम का खौफ था। बचपन अनाथालय में बीता लेकिन दिल में आजादी की ज्वाला धधकती रही। बस क्लिक करते जाइए और पढ़ते जाइए उस गौरव गाथा को जिस पर पूरे देश को नाज है।

Indian Freedom Fighter Shaheed Udham Singh jayanti
shaheed udham singh

हम बात कर रहे हैं अमर शहीद उधम सिंह की। आज के दिन ही यानि 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में शहीद उधम सिंह का जन्म हुआ था। सन 1901 में उधम सिंह की माता और 1907 में उनके पिता का निधन हो गया। इस घटना के चलते उन्हें अपने बड़े भाई के साथ अमृतसर के एक अनाथालय में शरण लेनी पड़ी। उधम सिंह का बचपन का नाम शेर सिंह और उनके भाई का नाम मुक्ता सिंह था, जिन्हें अनाथालय में क्रमश: उधम सिंह और साधु सिंह के रूप में नए नाम मिले।

Indian Freedom Fighter Shaheed Udham Singh jayanti
shaheed udham singh

बाद में सरदार उधम सिंह ने भारतीय समाज की एकता के लिए अपना नाम बदलकर राम मोहम्मद सिंह आजाद रख लिया था जो भारत के तीन प्रमुख धर्मों का प्रतीक है। ऊधम सिंह ने पासपोर्ट बनवाने के लिए अपना नाम बदल लिया था। गदर पार्टी से जुड़ने के बाद पांच साल तक कारावास में भी रहे। जेल से निकलने के बाद पासपोर्ट बनवा कर विदेश जाने की ठानी। भगत सिंह उनके दोस्त थे, दोनों लाहौर जेल में एक बार मिले भी थे। उधम सिंह भले ही अनाथालय में पल रहे थे, पर देश प्रेम को अपने अंदर पाल रहे थे। अनाथालय में उधम सिंह की जिंदगी चल ही रही थी कि 1917 में उनके बड़े भाई का भी देहांत हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Indian Freedom Fighter Shaheed Udham Singh jayanti
शहीद उधम सिंह

वह पूरी तरह अनाथ हो गए। 1919 में उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया और क्रांतिकारियों के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में शमिल हो गए और देश की आजादी तथा डायर को मारने की अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए लगातार काम करते रहे। उधम सिंह के सामने ही 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग नरसंहार हुआ था। वे गवाह थे उन हजारों बेनामी भारतीयों की नृशंस हत्या के, जो तत्कालीन जनरल डायर के आदेश पर गोलियों के शिकार हुए थे।

विज्ञापन
Indian Freedom Fighter Shaheed Udham Singh jayanti
शहीद उधम सिंह

यहीं पर उन्होंने जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर जनरल डायर और पंजाब के गवर्नर माइकल ओ डायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ले ली, जिसके बाद क्रांतिकारी बन गए। उधम सिंह के लंदन पहुंचने से पहले जनरल डायर 1927 में बीमारी के चलते मर गया था। पर वे माइकल ओ डायर को मारने का मौका ढूंढते रहे। 1934 में किसी तरह से वे लंदन पहुंचे और वहां 9, एल्डर स्ट्रीट कमर्शियल रोड पर रहने लगे। वहां उन्होंने एक कार खरीदी और साथ में अपना मिशन पूरा करने के लिए छह गोलियों वाली एक रिवॉल्वर भी।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed