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आज उस परमवीर का जन्मदिन जिससे कांपते थे दुश्मन, चंडीगढ़ से खास कनेक्शन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 09 Sep 2017 11:24 AM IST
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परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
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आज देश के उस परमवीर का जन्मदिन है, जिसके नाम से ही दुश्मन कांप जाया करता था। इनका चंडीगढ़ से बेहद खास कनेक्शन रहा, जानिए इस जांबाज से जुड़ी खास बातें...
परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
बात हो रही है परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा की। मूलरूप से हिमाचल प्रदेश (पालमपुर) के रहने वाले कैप्टन बत्रा ने 1992 से 1994 तक चंडीगढ़ स्थित डीएवी कॉलेज के स्टूडेंट रहे। उन्होंने इस कॉलेज में एनसीसी ज्वाइन की। इसके बाद आर्मी ऑफिसर बनने का सफर शुरू हुआ। एनसीसी में शानदार प्रदर्शन के आधार पर विक्रम बत्रा को एनसीसी के बेस्ट कैडेट से नवाजा गया था।
कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा
डीएवी कॉलेज में एनसीसी ऑफिसर बताते हैं कि मुझे आज भी वह दिन याद है, जब विक्रम ने एनसीसी के आर्मी विंग में कैडेट के रूप में ज्वाइन किया था। विक्रम बत्रा एनसीसी के मेहनती कैडेट थे। वह काफी होनहार और आक्रमक थे। हर क्लास में उपस्थित रहते थे और अपनी टीम को लीड करते थे। एक आर्मी ऑफिसर बनने की जो क्वालिटी होनी चाहिए वह सब उनमें थी।
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परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
डीएवी कॉलेज में एनसीसी ऑफिसर बताते हैं कि मुझे आज भी वह दिन याद है, जब विक्रम ने एनसीसी के आर्मी विंग में कैडेट के रूप में ज्वाइन किया था। विक्रम बत्रा एनसीसी के मेहनती कैडेट थे। वह काफी होनहार और आक्रमक थे। हर क्लास में उपस्थित रहते थे और अपनी टीम को लीड करते थे। एक आर्मी ऑफिसर बनने की जो क्वालिटी होनी चाहिए वह सब उनमें थी।
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परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
चंडीगढ़ का डीएवी कॉलेज सेक्टर-10 हो या फिर पंजाब यूनिवर्सिटी का एमए अंग्रेजी विभाग या फिर सेक्टर-17 का एक सैलून। शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा यहां हीरो हैं। हों भी क्यों न, एक जीत के बाद वह चिल्लाते थे...ये दिल मांगे मोर। परमवीर चक्र शहीद कैप्टन के पिता गिरधारी लाल बत्रा बताते हैं कि विक्रम की बात एकदम अलग थी। उनका चयन आर्मी से पहले मर्चेंट नेवी में हो गया था। उनका हांगकांग में हेडक्वार्टर था।