{"_id":"5b0118ad4f1c1b5c798b546f","slug":"indian-army-big-decision-in-favour-of-soldiers","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"भारतीय सेना में फौजियों को दिया बड़ा तोहफा, फायदा ही फायदा होगा...यहां पढ़िए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारतीय सेना में फौजियों को दिया बड़ा तोहफा, फायदा ही फायदा होगा...यहां पढ़िए
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली
Updated Sun, 20 May 2018 12:13 PM IST
विज्ञापन
indian army
- फोटो : AMAR UJALA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय सेना में अपने फौजियों को बहुत बड़ी राहत देते हुए एक अहम फैसला लिया है, जिससे फायदा ही फायदा होगा, यहां पढ़िए।
भारतीय सेना
फौज में जंग के दौरान दिव्यांग हुए पूर्व फौजियों को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें सीएसडी कैंटीन से कार लेने के लिए 10 साल की सेवा शर्त खत्म कर दी है। इसकी पुष्टि खुद एक्स-सर्विसमैन ग्रीवांस सेल के प्रधान लेफ्टिनेंट एसएस सोही ने की। उन्होंने कहा कि इस सारी कार्रवाई के लिए काफी संघर्ष किया गया। इसके बाद फौज ने उक्त शर्त को हटाया है।
indian army
इस फैसले की खुशी में शुक्रवार को फेज-10 स्थित सैनिक सदन में लड्डू भी बांटे गए। रज्जाक मोहम्मद ने कर्नल सोही और उनकी टीम की तरफ से किए गए कार्यों की प्रशंसा की। इस मौके पर ब्रिगेडियर वीके सिंह, कैप्टन मक्खन सिंह, कैप्टन गुरमीत सिंह, आरपी सिंह, प्रकाश सिंह, रच्छपाल सिंह, सूबेदार प्रीतम सिंह, गुरपाल सिंह, लेफ्टिनेंट कमांडेंट एस शर्मा मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
भारतीय सेना
- फोटो : SELF
ऐसे शुरू हुआ संघर्ष
कर्नल सोही ने बताया कि नौ राष्ट्रीय राइफल्स के राइफलमैन रज्जाक मोहम्मद 2002 में आतंकवादियों से हुए एक मुकाबले के दौरान आमने सामने की गोलीबारी में बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण फौज ने उन्हें 100 फीसदी दिव्यांगता पेंशन देकर घर भेज दिया था। जिस समय उन्हें घर भेजा गया था उस समय उसकी नौकरी की अवधि छह साल थी। रजाक मोहम्मद गांव बड़ा गाऊ तहसील नारायणगढ़ (हरियाणा) के रहने वाले हैं।
कर्नल सोही ने बताया कि नौ राष्ट्रीय राइफल्स के राइफलमैन रज्जाक मोहम्मद 2002 में आतंकवादियों से हुए एक मुकाबले के दौरान आमने सामने की गोलीबारी में बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण फौज ने उन्हें 100 फीसदी दिव्यांगता पेंशन देकर घर भेज दिया था। जिस समय उन्हें घर भेजा गया था उस समय उसकी नौकरी की अवधि छह साल थी। रजाक मोहम्मद गांव बड़ा गाऊ तहसील नारायणगढ़ (हरियाणा) के रहने वाले हैं।
विज्ञापन
indian army
कर्नल सोही ने बताया कि कुछ समय पहले उनको रज्जाक मोहम्मद का फोन आया और सीएसडी कैंटीन से कार दिलाने के लिए मदद मांगी। कर्नल सोही ने उन्हें आर्मी हेडक्वार्टर में एक कार खरीदने की इजाजत देने के लिए अर्जी देने की सलाह दी। 1 अप्रैल को आर्मी हेडक्वार्टर में अर्जी दी। जिसके बाद उसे आर्मी हेडक्वार्टर ने उसे रूलिंग नंबर एल तारीख 12-01-16 का हवाला दिया गया।