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इंडियन एयरफोर्स को जल्द मिलेगा महाभारत का 'सुदर्शन चक्र', जानिए क्या है ये?

Sun, 22 Jan 2017 09:24 AM IST
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा) Updated Sun, 22 Jan 2017 09:24 AM IST
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indian airforce working on to invent sudarshan chakra missile, special project
इंडियन एयरफोर्स
इंडियन एयरफोर्स की ताकत में बहुत जल्द महाभारत का 'सुदर्शन चक्र' जुड़ने वाला है। इसे लेकर बड़ा प्रोजेक्ट तैयार है, जानिए इसके बारे में सब कुछ।
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इंडियन एयरफोर्स
भारत अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की मारक क्षमता और गति में इजाफा करने के साथ ही महाभारत के सुदर्शन चक्र जैसी मिसाइल बनाने पर काम करेगा। मिसाइल तकनीक नियंत्रण व्यवस्था का सदस्य बनने के बाद भारत ने इसकी तैयारी कर ली है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में ब्रह्मोस के चीफ कंट्रोलर आरएंडडी, ब्रह्मोस एरोस्पेस के सीआईओ और एमडी सुधीर कुमार मिश्रा ने यह जानकारी दी।
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इंडियन एयरफोर्स
मिश्रा वीरवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एनआईटी में आयोजित चार दिवसीय टेक स्पर्धा के उद्घाटन कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। मिश्रा ने बताया कि भारत अपनी क्षमता के दम पर ही ब्रह्मोस की गति और मारक क्षमता में इजाफा करने में सक्षम है। अभी ब्रह्मोस की मारक क्षमता 300 किमी है और स्पीड 2.08 मैक। एक मैक का सीधा मतलब है कि 1195 किमी/घंटा की स्पीड।
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इंडियन एयरफोर्स
ताजा योजना के अनुसार मिसाइल की गति 5 मैक तक करने की योजना है और इस पर अगले दो से तीन साल में काम पूरा होने की उम्मीद है। मिश्रा ने बताया कि मिसाइल 10 मीटर तक नीचे आ सकती है और इतनी देर में दुश्मन टारगेट का मुस्तैद रहना तो दूर अंतिम प्रार्थना करने का भी वक्त नहीं मिलता। मिश्रा ने इस बेहतरीन मिसाइल को तैयार करने का श्रेय डा. एपीजे अब्दुल कलाम को दिया।
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सुधीर कुमार मिश्रा के मुताबिक कलाम साहब 1993 में एक मीटिंग में मास्को गए थे। टी ब्रेक के समय उनकी नजर एक कमरे में रखी अधूरी मिसाइल पर गई। पूछा तो पता चला है कि यूएसएसआर के समय में मिसाइल की रूपरेखा तैयार हुई, लेकिन संयुक्त रशिया टूटने के बाद प्रोजेक्ट अधूरा रह गया। तब उन्होंने रूस के साथ मिलकर योजना पर काम करने की इच्छा जाहिर की थी। 1998 में समझौते के बाद सफलता मिली।
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