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'मां...! बात नहीं कर पाऊंगा, मेरा इंतजार न करियो, दुश्मन को मिट्टी में मिलाकर ही घर लौटूंगा'
Thu, 28 Feb 2019 04:06 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झज्जर(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झज्जर(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 28 Feb 2019 04:06 PM IST
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सार्जेंट विक्रांत शहीद
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जम्मू के बडगाम में चॉपर क्रैश में जान गंवाने वाले सार्जेंट विक्रांत की मां नहीं जानती थी कि शाम को जिस बेटे का कुशलक्षेम उसने पूछा है, अगली सुबह उसकी मौत की खबर आ जाएगी। पढ़ें एक मां की आपबीती...
सार्जेंट विक्रांत शहीद
हरियाणा के झज्जर जिले के गांव भदानी निवासी विक्रांत की मां ने बताया कि बेटे से मंगलवार शाम को आखिरी बार बात हुई थी। उसने फोन पर बताया था कि बॉर्डर पर तनाव है, अब वह जल्दी बात नहीं कर पाएगा। फ्लाइट भी यहां से काफी लेनी पड़ रही हैँ, ऐसे में वह कुछ दिन व्यस्त रहेगा और इस बार दुश्मन को मिट्टी में मिलाकर ही घर लौटेगा। बेटे के द्वारा कहे गए इन शब्दों को याद कर मां कांता के आंखों में आंसू आ जाते हैं, लेकिन गर्व जताते हुए वह खुद को मजबूत बना रही है।
सार्जेंट विक्रांत शहीद
पोते को भी देशसेवा के लिए सेना में भेजेगी मां
मां कांता देवी ने रोते हुए कहा कि उसे अपने बेटे पर गर्व है, जो देश के काम आया है। विक्रांत का बेटा वरदान अभी डेढ़ साल का है, बड़ा होने पर उसे भी वह आर्मी में भेजेगी। कांता देवी को ढांढस बंधाने के लिए परिवार की महिलाएं लगी हुई थी तो उधर शहीद की वीरांगना सुमन को भी घर को लोगों के द्वारा समझाया जा रहा था कि उसका पति देश के काम आया है, उस पर उसे गर्व करना चाहिए। सार्जेंट विक्रांत ने 2005 में इंडियन एयरफोर्स ज्वॉइन की थी। फिलहाल उसकी पोस्टिंग जम्मू के एयर स्टेशन में थी।
मां कांता देवी ने रोते हुए कहा कि उसे अपने बेटे पर गर्व है, जो देश के काम आया है। विक्रांत का बेटा वरदान अभी डेढ़ साल का है, बड़ा होने पर उसे भी वह आर्मी में भेजेगी। कांता देवी को ढांढस बंधाने के लिए परिवार की महिलाएं लगी हुई थी तो उधर शहीद की वीरांगना सुमन को भी घर को लोगों के द्वारा समझाया जा रहा था कि उसका पति देश के काम आया है, उस पर उसे गर्व करना चाहिए। सार्जेंट विक्रांत ने 2005 में इंडियन एयरफोर्स ज्वॉइन की थी। फिलहाल उसकी पोस्टिंग जम्मू के एयर स्टेशन में थी।
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सार्जेंट विक्रांत शहीद
सवा दो बजे मिली थी परिजनों को सूचना
सार्जेंट विक्रांत की मौत होने की सूचना एयरफोर्स के द्वारा उसके पिता कृष्ण को बुधवार को करीब सवा दो बजे फोन पर दी गई। देर शाम तक एयरफोर्स के अधिकारी परिजनों के सपंर्क में रहे। शहीद विक्रांत के परिवार से काफी लोग सेना में हैं। पिता कृष्ण के तीन भाई और एक बहन है। कृष्ण का छोटा भाई राज पहलवान कोऑपरेटिव बैंक से सेवानिवृत्ति के बाद गांव का सरपंच रह चुका है। उससे छोटी बहन उर्मिला के पिता राजेंद्र दहिया व उनका बेटा दोनों आर्मी में कर्नल हैं। उनसे छोटे किशनचंद रेलवे में तैनात हैं तथा उनसे छोटे भाई अशोक का बेटा वरूण नेवी में लेफ्टिनेंट हैं।
सार्जेंट विक्रांत की मौत होने की सूचना एयरफोर्स के द्वारा उसके पिता कृष्ण को बुधवार को करीब सवा दो बजे फोन पर दी गई। देर शाम तक एयरफोर्स के अधिकारी परिजनों के सपंर्क में रहे। शहीद विक्रांत के परिवार से काफी लोग सेना में हैं। पिता कृष्ण के तीन भाई और एक बहन है। कृष्ण का छोटा भाई राज पहलवान कोऑपरेटिव बैंक से सेवानिवृत्ति के बाद गांव का सरपंच रह चुका है। उससे छोटी बहन उर्मिला के पिता राजेंद्र दहिया व उनका बेटा दोनों आर्मी में कर्नल हैं। उनसे छोटे किशनचंद रेलवे में तैनात हैं तथा उनसे छोटे भाई अशोक का बेटा वरूण नेवी में लेफ्टिनेंट हैं।
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सार्जेंट विक्रांत शहीद
बच्चों को नहीं पता, पिता हो गए शहीद
सार्जेंट विक्रांत की मौत होने की सूचना से उनकी पांच वर्षीय बेटी काव्या बेखबर थी। मासूम काव्या मोबाइल हाथ में लिए गेम खेल रही थी। बच्चों की मासूमियत को देखकर हर किसी की आंखें नम हो रही थीं। पिता कृष्ण को ग्रामीण यह कहते हुए दिलासा दे रहे थे कि भगवान भी अच्छे लोगों को जल्दी बुला लेता है तो पिता रोते हुए कह रहे थे भगवान भी समय नहीं देखता। कृष्ण बता रहे थे कि विक्रांत ने गांव के किसी भी व्यक्ति के कहे हुए काम को मना नहीं किया। वो बड़ा ही सीधा और जमीन से जुड़ा हुआ लड़का था।
सार्जेंट विक्रांत की मौत होने की सूचना से उनकी पांच वर्षीय बेटी काव्या बेखबर थी। मासूम काव्या मोबाइल हाथ में लिए गेम खेल रही थी। बच्चों की मासूमियत को देखकर हर किसी की आंखें नम हो रही थीं। पिता कृष्ण को ग्रामीण यह कहते हुए दिलासा दे रहे थे कि भगवान भी अच्छे लोगों को जल्दी बुला लेता है तो पिता रोते हुए कह रहे थे भगवान भी समय नहीं देखता। कृष्ण बता रहे थे कि विक्रांत ने गांव के किसी भी व्यक्ति के कहे हुए काम को मना नहीं किया। वो बड़ा ही सीधा और जमीन से जुड़ा हुआ लड़का था।