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अगर जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंचे दल तो ऐसे निकलेगा पंजाब का हल

Tue, 07 Feb 2017 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 07 Feb 2017 09:23 AM IST
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If the parties have not reached the magic figure then it may be a solution to Punjab
पंजाब विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला

पंजाब विधानसभा चुनाव वोटिंग के बाद नेता और जनता सबकी नजरें 11 मार्च के नतीजों पर हैं। दिग्गजों की चर्चाओं में कयासों और अटकलों का दौर भी जोर पकड़ रहा है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है? 

If the parties have not reached the magic figure then it may be a solution to Punjab
punjab - फोटो : punjab

पंजाब में राजनैतिक विश्लेषक त्रिशंकू विधानसभा और राजनैतिक दलों को अल्पमत की संभावनाओं से भी इंकार नहीं कर रहे हैं। ऐसे यह सवाल सबके मन में है कि इन हालातों में कांग्रेस, शिअद-भाजपा गठबंधन और आप की रणनीति क्या होगी। इन हालातों में अगर आंकलन किया जाए तो ये प्रमुख संभावनाएं और समीकरण बनते नजर आते हैं।

If the parties have not reached the magic figure then it may be a solution to Punjab
पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 - फोटो :

अगर त्रिशंकु विधानसभा में आप की सीटें 45 से ज्यादा रहती हैं और कांग्रेस तथा शिअद-भाजपा गठबंधन 40 से कम पर सिमटते हैं तो ऐसे में भाजपा और शिअद राष्ट्रपति शासन चाहेंगे, मगर कांग्रेस इससे बचने के लिए आम आदमी पार्टी को बाहर से समर्थन की घोषणा कर सकती है। दिल्ली में केजरीवाल की पहली सरकार को कांग्रेस ने इस तरह से बाहर से समर्थन दिया था। हालांकि ऐसी सरकार कब तक चलेगी, यह कहना मुश्किल है।

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पंजाब विधानसभा चुनाव 2017

अगर त्रिशंकु विधानसभा में कांग्रेस की सीटें 50 के आसपास और आप की 45 से ज्यादा रहती हैं तो कांग्रेस के समर्थन से बनने वाली आप की सरकार को रोकने के लिए कांग्रेस को सबसे बड़ा दल होने के नाते मुद्दों पर आधारित बाहर से समर्थन की बात शिअद गठबंधन कर सकता है। ऐसी सरकार की उम्र भी ज्यादा लंबी नहीं होगी। जनाधार की लड़ाई में पानी और नशे जैसे मुद्दों पर समर्थन की बैशाखी हटाई जा सकती है।

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पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 - फोटो : अमर उजाला

अगर 11 मार्च के नतीजे इस तरह पांसा फेंकते हैं कि कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन को 40-40 से ज्यादा सीटें मिलती हैं आैर आम आदमी पार्टी 30 से नीचे रह जाती हैं। ऐसे में इसकी संभावना ब‌हुत कम हैं कि आम आदमी पार्टी किसी को समर्थन देगी। इन हालात में शिअद और भाजपा भी चाहेंगे कि राष्ट्रपति शासन लागू हो और राज्य में फिर से चुनाव करवाए जाएं।

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