पंजाब विधानसभा चुनाव वोटिंग के बाद नेता और जनता सबकी नजरें 11 मार्च के नतीजों पर हैं। दिग्गजों की चर्चाओं में कयासों और अटकलों का दौर भी जोर पकड़ रहा है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है?
अगर जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंचे दल तो ऐसे निकलेगा पंजाब का हल
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पंजाब में राजनैतिक विश्लेषक त्रिशंकू विधानसभा और राजनैतिक दलों को अल्पमत की संभावनाओं से भी इंकार नहीं कर रहे हैं। ऐसे यह सवाल सबके मन में है कि इन हालातों में कांग्रेस, शिअद-भाजपा गठबंधन और आप की रणनीति क्या होगी। इन हालातों में अगर आंकलन किया जाए तो ये प्रमुख संभावनाएं और समीकरण बनते नजर आते हैं।
अगर त्रिशंकु विधानसभा में आप की सीटें 45 से ज्यादा रहती हैं और कांग्रेस तथा शिअद-भाजपा गठबंधन 40 से कम पर सिमटते हैं तो ऐसे में भाजपा और शिअद राष्ट्रपति शासन चाहेंगे, मगर कांग्रेस इससे बचने के लिए आम आदमी पार्टी को बाहर से समर्थन की घोषणा कर सकती है। दिल्ली में केजरीवाल की पहली सरकार को कांग्रेस ने इस तरह से बाहर से समर्थन दिया था। हालांकि ऐसी सरकार कब तक चलेगी, यह कहना मुश्किल है।
अगर त्रिशंकु विधानसभा में कांग्रेस की सीटें 50 के आसपास और आप की 45 से ज्यादा रहती हैं तो कांग्रेस के समर्थन से बनने वाली आप की सरकार को रोकने के लिए कांग्रेस को सबसे बड़ा दल होने के नाते मुद्दों पर आधारित बाहर से समर्थन की बात शिअद गठबंधन कर सकता है। ऐसी सरकार की उम्र भी ज्यादा लंबी नहीं होगी। जनाधार की लड़ाई में पानी और नशे जैसे मुद्दों पर समर्थन की बैशाखी हटाई जा सकती है।
अगर 11 मार्च के नतीजे इस तरह पांसा फेंकते हैं कि कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन को 40-40 से ज्यादा सीटें मिलती हैं आैर आम आदमी पार्टी 30 से नीचे रह जाती हैं। ऐसे में इसकी संभावना बहुत कम हैं कि आम आदमी पार्टी किसी को समर्थन देगी। इन हालात में शिअद और भाजपा भी चाहेंगे कि राष्ट्रपति शासन लागू हो और राज्य में फिर से चुनाव करवाए जाएं।