सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ की वो बात नहीं रही। क्योंकि शहर में बारिश लोगों के लिए आफत बन जाती है। मंगलवार को भी कुछ ऐसा ही हाल हुआ। हीटिंग इफेक्ट से बने हाई लोकलाइज्ड क्लाउड ने मंगलवार को चंडीगढ़ में कहर बरपा दिया। छोटे-छोटे बादल शहर के पूर्वी हिस्सों में ही जमकर बरसे और देखते ही देखते शहर का आधा हिस्सा पानी में डूब गया। सेक्टर-9, किशनगढ़, मनीमाजरा और हाईकोर्ट के रास्ते तालाब में बदल गए, वहीं पीजीआई में भी पानी घुस गया। महज एक घंटे की बारिश में सुखना लेक का स्तर 1162.5 फीट से छलांग लगाकर 1163 फीट तक पहुंच गया और सीजन में पहली बार इसके दो फ्लड गेट खोलने पड़े। दूसरी ओर, शहर के दक्षिणी सेक्टर सूखे ही रह गए।
शहर में मंगलवार को सुबह 8 बजे से ही तेज धूप थी। सुबह 10.30 बजे तक धूप की तीव्रता ने जून के महीने की याद दिला दिया। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि शाम को भीषण बारिश का कारण भी यही तेज धूप बना। हीटिंग इफेक्ट के चलते शहर के पूर्वी हिस्सों में छोटे-छोटे लेकिन बेहद घने बादल बन गए जिन्हें मौसम विज्ञान की भाषा में हाई लोकलाइज्ड क्लाउड कहा जाता है। इन बादलों के पास फैलने का ज्यादा क्षेत्र नहीं मिला और ये एक ही जगह ठहरकर जमकर बरस पड़े। नतीजा यह हुआ कि सेक्टर-9, किशनगढ़, मनीमाजरा और हाईकोर्ट के आसपास का इलाका मिनटों में पानी-पानी हो गया। सभी रास्ते तालाब में बदल गए और पीजीआई ने नेहरू ब्लॉक तक में पानी घुस गया। लोकलाइज्ड बारिश के कारण शहर का नजारा दो हिस्सों में बंटा दिखाई दिया। एक ओर लोग घरों और सड़कों पर घुसे पानी से जूझते रहे तो दूसरी ओर दक्षिणी सेक्टरों में लोग बारिश का इंतजार ही करते रह गए। मौसम विभाग का कहना है कि यह हीटिंग इफेक्ट का नतीजा था, जिसमें सीमित क्षेत्र में बने बादल अचानक बरस पड़ते हैं और कुछ ही देर में भारी बारिश करा देते हैं।
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सेक्टर-17 की सड़क।
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एक तरफ 35 एमएम बारिश, दूसरी तरफ सूखा
महज दो घंटे की बारिश में मध्यमार्ग के पूर्वी हिस्से में 35 एमएम पानी दर्ज किया गया जबकि सेक्टर-39 और दक्षिणी चंडीगढ़ में एक बूंद भी बारिश नहीं हुई। मौसम के इस असमान मिजाज ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया। बारिश वाले इलाके में जहां तापमान में गिरावट दर्ज हुई, वहीं बाकी इलाकों में उमस और गर्मी से लोग परेशान हुए। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सुरेन्द्र पाल का कहना है कि बादल छोटे-छोटे समूहों में बने थे। इसकी वजह से खास इलाके में सक्रिय हुए। यहां तक की सेक्टर-39 के मौसम विभाग मुख्यालय के पास भी सूखा रहा, वहां बिल्कुल बारिश नहीं हुई।
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सड़क पर भरे पानी के बीच निकले बाइक सवार
- फोटो : अमर उजाला
सीजन में पहली बार खोलने पड़े लेक के दो फ्लड गेट
तेज बारिश के चलते सुखना लेक का जलस्तर खतरे का निशान 1163 फीट पार कर गया। इसके बाद दोपहर लेक के तीन में से दो फ्लड गेट खोलने पड़े। पहला फ्लड गेट दोपहर करीब 3:45 बजे तीन इंच और दूसरा 5:30 बजे छह इंच की ऊंचाई तक खोला गया। इस मानसून सीजन में पहली बार एक साथ दो फ्लड गेट खोले गए हैं। इससे पहले 6, 8, 15 और 17 अगस्त को सिर्फ एक-एक फ्लड गेट खोला गया था। लेक से निकला अतिरिक्त पानी सुखना चो के जरिए घग्गर नदी में छोड़ा जा रहा है लेकिन जैसे ही दूसरा फ्लड गेट खोला गया, पानी का तेज बहाव बापूधाम कॉलोनी और सुखना चो पर बने शास्त्री नगर पुल तक पहुंच गया। इस कारण पुल पर यातायात प्रभावित हो गया। आईटी पार्क पुलिस ने दोनों तरफ नाका लगाकर लोगों की आवाजाही रोक दी। देर रात लगभग 9 बजे पुल आवागमन के लिए खोला गया।
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बारिश के बाद सड़क पर भरा पानी और निकलते वाहन
- फोटो : अमर उजाला
पानी में डूबा किशनगढ़ और बापूधाम का पुल
बारिश की वजह से लेक की तरफ से किशनगढ़ और सेक्टर-26 के बापूधाम के पीछे का पुल पानी में डूब गया। बारिश के रुकने के बाद विभिन्न विभागों के कर्मचारी वहां पहुंचे और पानी को निकालने का काम किया। कुछ घंटों के लिए रास्ता भी बंद हो गया। हालांकि, बाद में खोल दिया गया। वहीं, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित रेलवे अंडरब्रिज और सेक्टर-15 व 11 का पुल भी पानी में डूबा। यहां खबर लिखे जाने तक पानी निकालने का काम चलता रहा।
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घुटनों तक भरा पानी।
- फोटो : अमर उजाला
3.5 सेंटीमीटर पानी की परत तैयार
35 मिमी बारिश होने का मतलब है कि जमीन की सतह पर 35 मिलीमीटर (यानी 3.5 सेंटीमीटर) मोटी पानी की परत बन जाना। आंकड़ों के हिसाब से एक मिमी बारिश का मतलब है एक वर्ग मीटर क्षेत्र में एक लीटर पानी गिरना। 35 मिमी बारिश का मलतब हुआ कि एक वर्ग मीटर क्षेत्र में 35 लीटर पानी भरना। जानकारों का कहना है कि किसी क्षेत्र विशेष में इतना पानी होना काफी ज्यादा माना जाता है।