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स्वर्ण जयंतीः हरियाणा के 5 जवान, जो हंसते-हंसते देश पर हुए कुर्बान

Wed, 02 Nov 2016 09:32 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 02 Nov 2016 09:32 AM IST
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golden jubli special, story of brave indian army soldiers of haryana martyr on border for india
देश के लिए शहादत देने वाले हरियाणा के बेटे
आज हरियाणा की स्वर्ण जयंती है। इस मौके पर हम आपको उन 5 जवानों की वीर गाथा सुनाने जो रहे हैं, जो हंसते-हंसते देश के लिए कुर्बान हो गए।


 
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शहीद मनदीप सिंह
दीवाली से दो दिन पहले 28 अक्तूबर शुक्रवार की रात को LOC पर कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में मुठभेड़ के दौरान हरियाणा का लाल मनदीप सिंह शहीद हो गया। कुरुक्षेत्र जिले के गांव अंटहेड़ी के मनदीप के शव को आतंकवादी क्षत-विक्षत करके भाग गए थे। शहीद मंदीप की कहानी अपने आप में अद्भुत है। 27 साल के मनदीप सिंह जम्मू-कश्मीर के माच्छिल सेक्टर में 17 सिख रेजिमेंट में तैनात थे। उनकी पत्नी प्रेरणा भी पुलिस में कांस्टेबल पद पर तैनात है। प्रेरणा हरियाणा पुलिस में है और बतौर कांस्टेबल शाहबाद में तैनात हैं। उसका मनदीप के साथ करीब दो साल पहले विवाह हुआ था।
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एलओसी पर फायरिंग में शहीद हुआ बीएसएफ जवान सुशील कुमार
23 अक्तूबर की रात को जम्मू कश्मीर में इंटरनेशनल बॉर्डर पर फायरिंग में पेहोवा के सुशील कुमार शहीद हो गए थे। इस वीर जवान की मौत गले में गोली लगने से हुई। शहीद जवान सुशील कुमार भारतीय सीमा सुरक्षा बल की 127 वीं बटालियन में जम्मू की आरएसपुरा सेक्टर में तैनात थे। पैंतालीस वर्षीय सुशील कुमार पिछले चौबीस वर्षों से बीएसएफ में तैनात थे। शहीद जवान अपने पीछे पत्नी सुनीता, बारहवीं में पढ़ने वाला बेटा मोहित व दसवीं में पढ़ने वाली बेटी महक व बूढ़ी मां सोमादेवी को छोड़ गये हैं। वहीं, शहादत से पहले सुशील ने अपनी मां से आखिरी बात की थी।
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शहीद पवन बेनीवाल
21 फरवरी 2016 को जींद के कैप्टन पवन बेनीवाल जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पांपोर इलाके में आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। कैप्टन मुठभेड़ में घायल हो गए थे। श्रीनगर के बादामीबाग में सेना के बेस अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया था। 23 वर्षीय पवन अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे और भारतीय सेना के 10 पैरा कमांडो में कैप्टन थे। कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल का जन्म 15 जनवरी 1993 में हुआ था। संयोग देखिए जिस दिन आर्मी अपना 'बर्थडे' सेलिब्रेट करती है उसी दिन कैप्टन भी अपना जन्मदिन सेलिब्रेट करते थे।

 
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बॉर्डर पर शहीद यमुनानगर का बेटा रॉकी
5 अगस्त 2015 को यमुनानगर जिले के बिलासपुर में रामगढ़ माजरा गांव के रहने वाले रॉकी ऊधमपुर में शहीद हो गए थे। बीएसएफ के करीब 50 जवान बस में सवार होकर जम्मू से कश्मीर जा रहे थे। रास्ते में आतंकवादियों ने बस पर हमला कर दिया। ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई जा रही थी। एक गोली रॉकी को भी लगी, लेकिन रॉकी ने बस में चढ़े रहे आंतकी को मार दिया। उसके हाथ में ग्रेनेड था। इस तरह रॉकी ने सेना के 50 जवानों को बचाया, लेकिन उसकी मौत हो गई। रॉकी का एक बड़ा भाई और रॉकी से छोटी बहन है। रॉकी वर्ष 2012 में बीएसएफ में भर्ती हुआ था।
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