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रोचक है एक साल बिस्तर पर रहने के बाद विनेश फोगाट के गोल्ड मेडलिस्ट बनने की कहानी, पढ़ें इंटरव्यू

Sat, 25 Aug 2018 03:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा) Updated Sat, 25 Aug 2018 03:03 PM IST
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Gold Medalist Wrestler Vinesh Phogat Interview on Success, Life, Struggle
vinesh phogat
रियो ओलंपिक में चोट लगने के बाद टूट गई थी, एक साल बिस्तर पर रहना पड़ा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। काफी रोचक है विनेश फोगाट के फिर से गोल्ड मेडलिस्ट बनने की कहानी, पढ़ें।
Gold Medalist Wrestler Vinesh Phogat Interview on Success, Life, Struggle
vinesh phogat
शरीर नहीं दे रहा था उचित प्रतिक्रिया
रियो ओलंपिक में चोटिल होने के बाद मैट पर वापसी करना, मेरी जिंदगी का सबसे चुनौतीपूर्ण सफर रहा है। इस दौरान मेरी लड़ाई खुद से थी। बाहरी सभी चीजें मेरे अनुकूल थी, बस मेरा शरीर ही उचित प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था। मुझे खुशी है कि मैंने इससे पार पाया। विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक पदक मेरी ख्वाहिशों की फेहरिस्त में सबसे ऊपर है। मेरा आत्मविश्वास स्वाभाविक है। मैट पर उतरने के बाद मुझे कुश्ती के सिवा दूसरी कोई भी चीज नहीं दिखती है। यहां तक कि कोच के निर्देशों पर भी मेरा कोई ध्यान नहीं होता है। मैं मैट पर हूं और मुझे कुश्ती लड़नी है, उस वक्त मुझे बस यही पता होता है।
Gold Medalist Wrestler Vinesh Phogat Interview on Success, Life, Struggle
पहलवान विनेश फोगाट
पहली बार कुश्ती के बाद खूब रोई थी
भले ही एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना राष्ट्रमंडल खेलों की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण है, पर मेरे लिए 2014 का ग्लासगो राष्ट्रमंडल स्वर्ण ज्यादा अहम है। वह ऐसा लम्हा था, जब पहली बार दुनिया ने एक और फोगाट की काबिलियत देखी थी। उस वक्त मैं पांचवीं कक्षा में थी। जब ताऊ जी (महावीर फोगाट) ने मुझसे कहा था कि मैं मैट पर कुश्ती लड़ूंगी। मैं बहुत खुश थी और बेसब्री से पूरा दिन अपनी बारी का इंतजार करती रही। देर शाम हो गई और मुझे लगा कि खेल खत्म होने वाले हैं। मैंने ताऊ जी से अपनी बारी के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि सामने वाली खिलाड़ी तुमसे उम्र में बड़ी है, इसलिए तुम नहीं खेल सकती। पहली बार मैट पर कुश्ती न लड़ पाने के गम में मैं उस दिन खूब रोई थी।
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Gold Medalist Wrestler Vinesh Phogat Interview on Success, Life, Struggle
विनेश फोगाट
शुरू में नहीं पसंद थी कुश्ती
हम सभी बहनों को ताऊ जी ने उस माहौल में कुश्ती सिखाई, जिस समाज में लड़कियों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं होती। हमारे समाज में पुरुषों का ही वर्चस्व है। शुरुआत में मुझे कुश्ती बिल्कुल पसंद नहीं थी। मैं बचपन में दूसरे बच्चों की तरह अन्य खेल खेलती थी। मैं भी दूसरी लड़कियों की तरह पढ़ाई-लिखाई करके नौकरी वगैरह के बारे में सोचती थी। लेकिन हमेशा कुश्ती के माहौल में रहने की वजह से धीरे-धीरे मेरा रुझान भी दांव-पेच की तरफ झुकता गया। जब मैं पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर खेली थी, तो मुझे अपने जूतों के फीते बांधने नहीं आते थे। मेरी बहन प्रियंका ने मेरे फीते बांधे थे। शायद नए जूतों से मिली खुशी के उत्साह में ही मैं वहां जीत गई थी। कुश्ती में शुरुआती सफलता के बाद लोगों के प्यार ने मुझे और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। हालांकि कुश्ती से दिल लगाने से पहले मुझे टेनिस से भी लगाव रहा है। उस वक्त सानिया मिर्जा की तस्वीरें मेरी धरोहर में शामिल थीं।
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Gold Medalist Wrestler Vinesh Phogat Interview on Success, Life, Struggle
ओलंपियन पहलवान विनेश फौगाट
बेवजह भी हंसती हूं
सुबह-शाम कड़ी ट्रेनिंग के बाद दिनचर्या में इतना वक्त ही नहीं बचता कि किसी दूसरे काम के बारे में सोचा जा सके। फिर भी खाली वक्त में मैं अपने दोस्तों से फोन पर बातें करना पसंद करती हूं। कभी-कभार ही फिल्में देखने के लिए वक्त निकाल पाती हूं। यहां तक कि मैंने दंगल भी अभी तक पूरी नहीं देखी है। यदि मैं बिना हंसे थोड़ी देर तक वक्त बिता दूं, तो मुझे लगता है कि मुझे कोई तकलीफ है, कोई दुख है, जो मुझे सता रहा है। हंसना मेरी आदतों में शुमार है। इसके लिए मुझे किसी वजह की जरूरत नहीं है। कभी-कभार कोच बेवजह हंसने के लिए मुझे डांटते भी हैं, मगर इतनी प्यारी आदत भला हल्की डांट से कहां जाने वाली है!
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