एक साथ जलीं 7 चिताएं, देखिए कैसे रोते-बिलखते रहे मां-बाप?
गांव में एक साथ 7 चिताएं जलीं। मृतकों के बुजुर्ग मां-बाप रोते-बिलखते रहे। जिसने भी यह दर्दनाक मंजर देख फूट-फूट कर रोया। रिपोर्टर: जसवीर सिंह भट्टी, संगरूर।
एक साथ जलीं 7 चिताएं, देखिए कैसे रोते-बिलखते रहे मां-बाप?
पंजाब के रोगला गांव में जलीं ये 7 चिताएं मणिकर्ण हादसे में मारे गए युवकों की थी। दो दिनों से घर में चूल्हे नहीं जले थे। गांव भर में सन्नाटा पसरा हुआ था। हर आंख में बस आंसू थे, बेबसी और मातम।
एक साथ जलीं 7 चिताएं, देखिए कैसे रोते-बिलखते रहे मां-बाप?
पीड़ित परिवारों के घरों के बाहर खड़े ग्रामीण एक दूसरे के साथ दो दिन पहले मणिकर्ण साहिब में मौत के आगोश में समाए सात नौजवानों के बारे में बातें कर रहे थे। जैसे ही नौजवानों के शव आए तो गांव में पसरा सन्नाटा चीख पुकार में बदल गया। पीड़ित परिवार ही नहीं बल्कि पूरे गांव के लोगों की आंखों से आंसू छलक रहे थे।
एक साथ जलीं 7 चिताएं, देखिए कैसे रोते-बिलखते रहे मां-बाप?
पीड़ित परिवारों की महिलाओं का तो हाल बेहाल था, जिन्हें संभालने के लिए गांव की महिलाएं उन्हें ढांढस बांधने में लगी हुई थीं। वीरवार का दिन इस गांव के लिए ऐसा मनहूस दिन था जब गांव के श्मशानघाट में एक साथ सात चिताएं जलीं। बीते मंगलवार को दोपहर इस गांव के सात नौजवानों यादविंदर सिंह, लाडी, सोनी राम, गुरदीप सिंह, गोपाल, रघुवीर, काका सिंह की मणिकर्ण साहिब के गुरुद्वारे की सराय पर चट्टानों के गिरने से मौत हो गई थी।
एक साथ जलीं 7 चिताएं, देखिए कैसे रोते-बिलखते रहे मां-बाप?
ये नौजवान अपने साथियों के साथ मोटरसाइकिलों पर मणिकर्ण साहिब गुरुद्वारा की यात्रा करने गए थे और उस दिन से ही पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है। दिड़बा के नायब तहसीलदार प्रबोध चंद्र के नेतृत्व में एक टीम कुल्लू शव लाने के लिए गई थी। वह वीरवार सुबह करीब आठ बजे शव लेकर गांव रोगला पहुंची।