मंत्री के पोते ने कार से कुचलकर मुख्यमंत्री वीरभ्रद सिंह के भतीजे की हत्या कर दी। वारदात के 4 दिन बाद मामले में एक नया चौंका देने वाला मोड़ आ गया है।
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अकांक्ष के हत्यारोपियों का लुकआउट नोटिस
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, दोनों आरोपियों में से एक हरमेहताब सिंह उर्फ फरीद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी। वहीं फरीद की ओर से एडवोकेट सुखदीप सिंह बराड़ द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि हरमेहताब मामले में बेकसूर है और उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। जिस कार से यह वारदात हुई, वह न तो उसका मालिक है और न ही वह उस कार को चला रहा था।
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हिमाचल के सीएम वीरभद्र सिंह के साले के बेटे की हत्या
- फोटो : अमर उजाला
याचिका में कहा गया है कि हादसे के वक्त कार बलराज सिंह रंधावा चला रहा था। ऐसे में उसके खिलाफ आईपीसी 302 (हत्या की धारा) के तहत उसके खिलाफ केस नहीं बनता। वैसे भी हरमेहताब की अकांक्ष से कोई रंजिश नहीं थी। पुलिस केस के अनुसार भी देखा जाए तो वारदात को लेकर उसकी कोई आपराधिक मंशा नहीं बनती। फरीद को इसलिए आरोपी बनाया गया है, क्योंकि वह बलराज के साथ कार में था।
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Akansh Murder case
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वहीं पुलिस को हरमेहताब से कुछ रिकवर भी नहीं करना है। ऐसे में वह अग्रिम जमानत मिलने पर पुलिस जांच भी ज्वाइन करने को तैयार है। याचिका पर जिला अदालत में मंगलवार को सुनवाई होगी। दूसरी ओर पुलिस के हाथ एक सीसीटीवी लगी है, जिसमें दिख रहा है कि वारदात वाली रात को पौने तीन बजे तक बलराज सिंह रंधावा और हरमेहताब उर्फ फरीद अकांक्ष के सेक्टर-9 स्थित कैफे में ही थे। उनके साथ तीन लड़कियां भी मौजूद थीं।
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सीसीटीवी में दिख रहा है कि जब अकांक्ष 2:45 बजे कैफे से बाहर आता है तो फरीद अन्य लोगों के साथ निकल रहा होता है और दोनों रुककर हाथ भी मिलाते हैं। बलराज फरीद से कुछ देर पहले ही कैफे से बाहर निकल गया था। उस समय नहीं लगा कि उनके बीच में कुछ हुआ था। वहीं हत्या करने के आरोपियों का यूटी पुलिस चार दिन बाद भी सुराग लगाने में नाकाम रही है। वहीं सोमवार को पुलिस के आला अफसर सेक्टर-3 के थाने में बैठकर मीटिंग ही करते दिखे।