देखिए, 200 वर्ष से ज्यादा पुरानी नाट्य विधा
मशहूर नृत्यांगना पूर्वाधनश्री ने रविवार को चंडीगढ़ आर्ट एंड हैरिटेज फेस्टिवल के समापन समारोह में विलासिनी नाट्यम की प्रस्तुति दीं। यह उनकी सिटी ब्यूटीफुल में पहली प्रस्तुति थी। फेस्टिवल में अमर उजाला मीडिया पार्टनर था। इस विधा को लेकर पूर्वाधनश्री का दर्द भी शब्दों में उतर आया।
देखिए, 200 वर्ष से ज्यादा पुरानी नाट्य विधा
पूर्वाधनश्री ने बताया कि विलासिनी नाट्यम 200 वर्ष से ज्यादा पुरानी नाट्य विधा है। इसे देवदासियां मंदिर में किया करती थीं। देवदासियों ने खुद ही इस विधा को अगली पीढ़ी को नहीं सिखाया। दरअसल लोग इस नृत्य को सम्मान की नजर से नहीं देखते थे। यही वजह रही कि यह नाट्य विधा सिमटती चली गई।
देखिए, 200 वर्ष से ज्यादा पुरानी नाट्य विधा
पूर्वाधनश्री ने बताया कि भरतनाट्यम का ही एक अंग रही यह नृत्य विधा वर्तमान में गुम सी होती जा रही है। लोग इस नृत्य विधा को कम ही सीख रहे हैं। यही कारण है कि इसे संरक्षित करने की जरूरत है। इसके लिए देश की कुछ नृत्यांगनाएं अपने स्तर पर प्रयास कर रही हैं।
देखिए, 200 वर्ष से ज्यादा पुरानी नाट्य विधा
पूर्वाधनश्री ने मात्र पांच साल की उम्र में ही अपनी मां से भरतनाट्यम सिखना शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि विलासिनी नाट्यम आंध्रप्रदेश के मंदिरों में
परंपरागत रूप से किया जाने वाला नृत्य है। स्वप्न सुंदरी इस विधा की पारंगत
मानी जाती हैं। उन्होंने ही पूर्वाधनश्री को यह विधा सीखने को प्रेरित किया।
देखिए, 200 वर्ष से ज्यादा पुरानी नाट्य विधा
पूर्वाधनश्री ने कहा कि अब शास्त्रीय संगीत की पैकेजिंग भी होती है, जिसमें समय कम या ज्यादा होता है। नर्तक अब इसकी प्रस्तुति कम समय में देते हैं। लोग अब शास्त्रीय नृत्य को अपने बच्चों को हॉबी क्लास के तौर भी सिखा रहे हैं। इससे डांसर्स को शिक्षकों के तौर पर रोजगार मिल रहा है।