ई-वे बिल सिस्टम लागू होने जा रहा है, इससे पहले एक जरूरी काम करना होगा। यह प्रणाली जहां कारोबारियों के लिए तोहफा है, वहां अफसरों के लिए बड़ी टेंशन है।
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ई वे बिल
- फोटो : SOCIAL MEDIA
दरअसल, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के तहत ई-वे बिल व्यवस्था शुरू होने से महज तीन दिन पहले सरकार ने कारोबारियों एवं ट्रांसपोर्टरों से इसके प्लेटफॉर्म पर जल्द से जल्द पंजीकरण कराने को कहा है। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था शुरू होने से पहले इस पर अधिक से अधिक कारोबारी पंजीकरण करा लें, ताकि माल के परिवहन में कोई दिक्कत नहीं हो।
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ई वे बिल
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ई-वे बिल प्रावधानों को पहली बार एक फरवरी से लागू किया गया था, लेकिन परमिट जारी करने वाली प्रणाली में खामियां आने के बाद इसके कार्यान्वयन पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने जीएसटीएन को एक फुलप्रूफ प्रणाली तैयार करने को कहा था। अब इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि रोज करीब 75 लाख अंतर-राज्यीय ई-वे बिल तैयार किया जा सकें।
गौर करने वाली बात यह है कि हरियाणा से दूसरे राज्य में माल ले जाने और दूसरे राज्यों से हरियाणा में माल आने पर ही ई-वे बिल लागू होगा। राज्य के अंदर माल की आवाजाही में ई-वे बिल को बाद में लागू किया जाएगा। हालांकि व्यापारियों की ई-वे बिल को लेकर चली आ रही दिक्कतें अभी भी दूर नहीं हुई हैं, लेकिन विभाग का कहना है कि पहले के मुकाबले व्यापारियों में ई-वे बिल की स्वीकार्यता बढ़ी है।
जीएसटी विभाग के उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त (बिक्री कर) सुरेश कुमार बोडवाल ने बताया कि एक अप्रैल से लागू हो रहे ई-वे बिल को लेकर प्लान तैयार कर लिया गया है। अब वे अधिकारी व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से मीटिंग करेंगे और उन्हें ई-वे बिल का उपयोग करने के बारे में फिर से जानकारी देंगे। इसके साथ ही अगर किसी व्यापारी या ट्रांसपोर्टरों को ई-वे बिल संबंधी समस्या है तो विभाग में आकर अधिकारियों से भी संपर्क किया जा सकता है।