दीप्ति के किडनेपर की दहशत, गांव में 3 साल से शादियां सूनी
साइको किडनेपर दवेंद्र की दहशत केवल दीप्ति के दिल में ही नहीं, ब्लकि उसके गांव की शादियों में भी सूनेपन के तौर पर दिखती हैं। उसका गांव कामी सोनीपत जिले में है।
दीप्ति के किडनेपर की दहशत, गांव में 3 साल से शादियां सूनी
सोनीपत के गांव कामी के कई युवक पहले भी अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि के चलते कुख्यात रहे हैं। हालांकि आपराधिक गलियारों में देवेंद्र उर्फ लीलू की जो चहलपहल थी, वो अन्य किसी की नहीं थी। उसकी दहशत का आलम यह है कि पिछले तीन सालों के दौरान गांव में होने वाले विवाह समारोह में घुड़चढ़ी की रस्म नहीं हुई। वजह यह थी कि एक शादी समारोह में घुड़चढ़ी के दौरान एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसमें पीछे दवेंद्र का काम बताया जाता था।
दीप्ति के किडनेपर की दहशत, गांव में 3 साल से शादियां सूनी
मुखबिरी के शक में वारदात को अंजाम देने की चर्चा रही, लेकिन पुलिस के यहां यह मामला दर्ज तक न हुआ। अपराधियों की दहशत के आगे परिजनों ने पुलिस को शिकायत तक नहीं दी। उस दिन के बाद गांव कामी में या तो घुड़चढ़ी होती नहीं है और अगर होती है तो एक-दो गली में घुमाकर इतिश्री कर ली जाती है। देवेंद्र आपराधिक छवि का होने के साथ-साथ शातिर मिजाज भी था। वर्ष 2005 में वह डीएसपी बनकर डकैती तथा जालसाजी करने का आरोपी रह चुका है।
दीप्ति के किडनेपर की दहशत, गांव में 3 साल से शादियां सूनी
बताया जा रहा है कि गांव में काफी समय पहले एक युवक की हत्या हो गई थी। उसकी मां ने हत्यारों को मारने के लिए देवेंद्र को सुपारी दे रखी थी। इसके बाद से देवेंद्र गांव में काफी सक्रिय था। हाल ही में गांव में ही महिला नेता के पति के साथ भी देवेंद्र की काफी खींचतान चल रही थी। दोनों तरफ से रोजाना 20-20 युवकों की फौज को तैयार किया जा रहा था। दोनों पक्षों द्वारा कई बार गांव में हवाईफायर भी किए जाते थे।
दीप्ति के किडनेपर की दहशत, गांव में 3 साल से शादियां सूनी
अपराध की दुनिया में देवेंद्र का आधिकारिक जन्म वर्ष 2001 में लूट की वारदात में नामजद होने से हुआ था। इसके बाद 10 मामले उस पर लूट और डकैती के दर्ज हुए थे। हालांकि देवेंद्र पर हत्या और दो हत्या के प्रयास के भी दो-दो मामले दर्ज हैं। खास बात यह है कि सोनीपत में देवेंद्र वर्ष 2005 और 06 के दौरान ही सबसे अधिक सक्रिय रहा था। इसके बाद तो उसने 2011, 12 और 14 में जिले में एक-एक वारदात को अंजाम दिया, वो भी अपना खौफ जिंदा रखने के लिए।