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डायबिटीज है तो आपको ये गंभीर बीमारी भी हो सकती है, जानिए क्या होगा फिर?

Thu, 30 Nov 2017 05:14 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 30 Nov 2017 05:14 PM IST
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diabeties patient may suffer from osteoporosis, may be dangerous
डायबिटीज
अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो जान लीजिए कि आपको एक गंभीर बीमारी भी हो सकती है, जिसके नुकसान इतने खतरनाक हैं कि आप यकीं नहीं कर पाएंगे।
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डायबटीज
जान लीजिए कि लंबे समय तक डायबिटीज होने से कई मरीजों में चारकोट नामक बीमारी हो जाती है। इससे पैरों की हड्डियां टूटने लगती हैं। डायबिटिक फुट होने के कारण मरीजों को हड्डियों के टूटने का पता नहीं चलता। धीरे-धीरे घाव बनता है। घाव का भी कई बार पता नहीं चलता और मरीज चलते रहते हैं। इससे उनका पैर भी टेढ़ा होता है। कइयों में तो घाव इतना गंभीर बनता है कि मरीजों के पैर काटने तक नौबत पहुंच जाती है।
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डायबिटीज, हेल्‍थ - फोटो : फाइल फोटो
ऐसे कई मरीज पीजीआई पहुंच रहे थे, मगर उनके इलाज का कोई ठोस तरीका नहीं मिल रहा था। पीजीआई के एंडोक्रिनोलाजी के डॉ. आशु रस्तोगी ने इसके लिए एक नया प्रयोग किया। जो दवा अस्टियोपोरोसिस के मरीजों को दी जा रही थी, उस दवा का इस्तेमाल इन मरीजों में करने का फैसला लिया गया।  ट्रायल हुआ और प्रयोग सफल रहा। एक साल तक मरीजों को दवा दी गई। दवा देने के बाद मरीजों की हड्डियां मजबूत हुईं और हड्डियां का टूटना भी बंद हो गया।
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डायबिटीज, हेल्‍थ - फोटो : फाइल फोटो
अब मरीज दोबारा से अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। इसे अमेरिकन क्लीनिकल ट्रायल में रजिस्टर्ड कराया गया और 24 मरीजों में परीक्षण सफल रहा। आस्टियोपोरोसिस के मरीजों की हड्डियां कमजोर होने पर उन्हें टैरीपैराटाइड का डोज दिया जाता है। इससे मरीजों की हड्डियां मजबूत होती हैं। डॉ. आशु और अन्य सहकर्मियों ने इस दवा का विश्व में पहली बार चारकोट के मरीजों में ट्रायल किया।

 
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bones
इससे पहले पीजीआई के डाक्टरों ने अपने ट्रायल को अमेरिकन क्लीनिकल ट्रायल में रजिस्टर्ड कराया। उसके बाद 24 मरीजों में टैरीपैराटाइड दवा का डोज रोजाना एक साल तक दिया गया। इस दौरान एक भी बार मरीज की हड्डी नहीं टूटी। उल्टा और मजबूत हो गई। हालांकि, मरीजों के पैर तो सीधे नहीं हो पाए, मगर उन्हें मोडिफाइड जूते मुहैया करवाए गए। जूतों की मदद से वे आसानी अब चल सकते हैं। पीजीआई का दावा है कि इससे पहले टैरीपैराटाइड दवा का इस्तेमाल किसी भी देश में नहीं किया गया।
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