पंजाब के तरनतारन में नशे की गिरफ्त में आई पंजाब की जवानी को इस दलदल से बाहर निकालने के लिए एक परिवार ने अपने जवान बेटे के कफन को ही केंद्र सरकार के लिए मेमोरंडम बना दिया। कफन रूपी मेमोरंडम सौंपने के लिए सैकड़ों लोगों को एसडीएम पट्टी कार्यालय के बाहर शव के साथ घंटों बैठना पड़ा। बाद में मौके पर पहुंचे डीएसपी पट्टी ने कपड़े पर लिखा मेमोरंडम लेने से इनकार कर दिया। इस पर लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
ड्रग से बेटे की मौत के बाद प्रदर्शन
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ड्रग से बेटे की मौत के बाद प्रदर्शन
- फोटो : amar ujala
बाद में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर डीएसपी ने कफन रूपी मेमोरंडम लिया। श्री गुरु राम दास कालोनी पट्टी निवासी मुख्तार सिंह पावरकॉम में कर्मी हैं। इनका 27 वर्षीय बेटा मंजीत सिंह उर्फ मन्ना बीए पास होने के बावजूद बेरोजगार होने कारण नशे का आदी हो गया। मन्ना ने आधी रात हेरोइन की अधिक डोज ले ली। इससे उसकी मौत हो गई। नशे की गिरफ्त में आने से पट्टी शहर में हुई अनगनित मौतों के बाद सरकार को जगाने लिए मृतक के परिवार ने कफन रूपी ज्ञापन भारत सरकार को देने का फैसला किया।
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इसके लिए शहर में बाकायदा मुनादी कराई गई। गुरु रामदास कालोनी पट्टी से मंजीत का शव लेकर परिवार जब श्मशान घाट लिए रवाना हुआ तो काफिला बड़ा होता गया। पंजाब कांग्रेस के महासचिव हरमिंदर सिंह गिल, शहरी कांग्रेस अध्यक्ष दलबीर सिंह शेखों, पार्षद कुलविंदर सिंह बब्बा, सुखविंदर सिंह सिद्धू, आम आदमी पार्टी के नेता गुरमहावीर सिंह सरहाली, सीपीआइ के कामरेड महावीर सिंह और अन्य पार्टियों के नेता भी मंजीत सिंह मन्ना की अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
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अपने पुत्र के शव पर कफन रूपी मेमोरंडम डालकर मुख्तार सिंह गलियों, बाजारों में दुहाई दे रहा था कि अपने बच्चों को बचा लो नहीं तो उनका भी हश्र भी मन्ना जैसा होगा। मन्ना का शव एसडीएम पट्टी अमनदीप सिंह भट्टी के कार्यालय समक्ष लगाया गया। करीब डेढ़ घंटा परिजन शव रखकर इस लिए इंतजार करते रहे कि कफन रूपी मेमोरंडम को भारत सरकार को सौंपा जा सके। काफी देर तक प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।