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फोन पर कहा- बड़ी तरक्की होने वाली है; दो दिन बाद घर पहुंचा शव
Thu, 27 Apr 2017 09:40 AM IST
रमेश शुक्ला ‘सफर’/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
रमेश शुक्ला ‘सफर’/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Thu, 27 Apr 2017 09:40 AM IST
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शहीद रघुबीर के गांव में नहीं जला चूल्हा
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फोन आया कि प्रमोशन होने वाला है। मैं इंसपेक्टर से डीएसपी बनने वाला हूं लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, तस्वीरें
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सीआरपीएफ इंस्पेक्टर रघुबीर सिंह
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिला स्थित बुरकापाल में नक्सली हमले में शहीद हुए अमृतसर के सठियाला गांव निवासी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) इंसपेक्टर रघुबीर सिंह के दोनों बच्चे (बेटा त्रिलोचन व बेटी सिमरन) नक्सलियों के खिलाफ हथियार उठाने को तैयार हैं।
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Martyr Raghubir Singh
बेटे की उम्र 22 वर्ष है तो बेटी अभी 17 वर्ष की है। पहले रघुबीर सिंह पोस्टिंग के दौरान परिवार को साथ रखते थे। पिछले दो सालों से छत्तीसगढ़ में पोस्टिंग हुई तो दोनों बच्चे की पढ़ाई के खातिर पत्नी बलजीत कौर का चंडीगढ़ में रहने का प्रबंध कर दिया था। बेटा बीटेक कर रहा है और बेटी प्लस वन में है।
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Martyr Raghubir Singh
मंगलवार सुबह शहीद रघुबीर सिंह का तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को छत्तीसगढ़ से दिल्ली और दिल्ली से पठानकोट सेना के हैलीकाप्टर में लाया गया। पठानकोट से रघुबीर सिंह का शव कुछ देर के लिए उनके ससुराल (बटाला के पास गांव उधनवाल) ले जाया गया। वहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इलाके के विधायक संतोख सिंह भलाईपुर समेत जिला प्रशासनिक अधिकारी शहीद के घर पहुंचे।
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Martyr Raghubir Singh
उधर, गांव सठियाला में करीब 85 घर हैं। रघुबीर सिंह की शहादत के बाद किसी घर में चूल्हा नहीं जला। गांव के स्कूल में छुट्टी कर दी गई वहीं सारा गांव शहीद को नमन करने उसके पैतृक घर के बाहर जमा रहा। बलजीत कौर (40) चंडीगढ़ में रहते हुए हर रोज पति से फोन पर बात करती थी। दो दिन पहले ही उसकी बात फोन पर हुई तो रघुबीर ने कहा था कि प्रमोशन होने वाला है। मैं इंसपेक्टर से डीएसपी बनने वाला हूं। प्रमोशन मिलते ही छुट्टी लेकर घर आऊंगा। उसके बाद रघुबीर सिंह से बात नहीं हुई।
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