{"_id":"5eb39657b22f155a2233a709","slug":"coronavirus-lockdown-fraud-via-online-books-shooping-and-home-delivery","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"ऑनलाइन ठगी का नया तरीका, देखिए कहीं आप भी शिकार न बन जाएं...किताबें खरीदें पर ध्यान से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑनलाइन ठगी का नया तरीका, देखिए कहीं आप भी शिकार न बन जाएं...किताबें खरीदें पर ध्यान से
Thu, 07 May 2020 01:26 PM IST
खुशबू गोयल
अमित गुप्ता, चंडीगढ़
अमित गुप्ता, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 07 May 2020 01:26 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
कोरोना संक्रमण की वैश्विक महामारी के बीच जालसाजों ने ठगी करने का अब एक नया तरीका खोज निकाला है। देखिए कहीं आप भी इसका शिकार न बन जाएं। शातिर ठगों ने शराब की ऑनलाइन सप्लाई के बाद अब किताबों की डिलीवरी करने का झांसा देना शुरू किया है। साइबर सेल चंडीगढ़ में ऐसा ही एक मामला सामने आया। सेक्टर 31 थाने में मामला दर्ज करवाया गया है। ज्यादा जानकारी के लिए आगे की स्लाइड देखें...
प्रतीकात्मक तस्वीर
हुआ यूं कि सेक्टर 47 में स्वामी भगत नेगी परिवार समेत रहते हैं। उनका बेटा दसवीं का छात्र है। गत 29 अप्रैल को बेटे को कुछ किताबों की जरूरत थी, लेकिन कर्फ्यू के चलते शहर के बुक व स्टेशनरी स्टोर बंद थे। उन्होंने सेक्टर 19 स्थित मनचंदा बुक स्टोर का नंबर तलाशने के लिए गूगल पर सर्च किया। उक्त बुक स्टोर के नाम से एक लिंक पर दो लैंडलाइन नंबर दिखें। उन्होंने जब लैंडलाइन नंबर पर फोन किया तो नंबर लगा नहीं। इसके थोड़ी देर बाद एक अनजान नंबर से कॉल आई। शख्स बोला, आपने अभी फोन किया था तो उन्होंने पूछा कि क्या आपकी शॉप खुली है, जवाब आया कि कोरोना के चलते दुकान बंद है, लेकिन आपका ऑनलाइन ऑर्डर लेकर बुक घर तक डिलीवरी करवा दी जाएगी।
प्रतीकात्मक तस्वीर
ऐसे हुई धोखाधड़ी
जालसाज ने शिकायतकर्ता से कहा कि किताबों की लिस्ट व्हाट्सऐप पर भेज दीजिए। सभी किताबें आपके घर तक डिलीवर कर दी जाएंगी। इसका 730 रुपये का बिल ऑनलाइन पेमेंट देने के लिए एक जालसाज महिला और युवक ने झांसे में लेकर उनके मोबाइल में क्विक सपोर्ट ऐप डाउनलोड करवाया। उसके बाद शिकायतकर्ता के खाते से 39999, 39999, 19999, 19999, 15400 और 20 हजार उड़ गए। उन्होंने तुरंत बैंक कस्टमर केयर को कॉल करके खाते को ब्लॉक करवाकर मामले की सूचना साइबर सेल पुलिस को दी।
जालसाज ने शिकायतकर्ता से कहा कि किताबों की लिस्ट व्हाट्सऐप पर भेज दीजिए। सभी किताबें आपके घर तक डिलीवर कर दी जाएंगी। इसका 730 रुपये का बिल ऑनलाइन पेमेंट देने के लिए एक जालसाज महिला और युवक ने झांसे में लेकर उनके मोबाइल में क्विक सपोर्ट ऐप डाउनलोड करवाया। उसके बाद शिकायतकर्ता के खाते से 39999, 39999, 19999, 19999, 15400 और 20 हजार उड़ गए। उन्होंने तुरंत बैंक कस्टमर केयर को कॉल करके खाते को ब्लॉक करवाकर मामले की सूचना साइबर सेल पुलिस को दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
क्विक सपोर्ट ऐप से ठगी
बता दें कि साइबर सेल में क्विक सपोर्ट ऐप से धोखाधड़ी के मामले पहले भी आते रहे हैं। साइबर सेल एक्सपर्ट बताते हैं कि क्विक सपोर्ट ऐप से मोबाइल को एक्सेस किया जा सकता है। इस ऐप को डाउनलोड कराने के बाद साइबर अपराधी एक नंबर पूछते हैं, यह नंबर ऐप डाउनलोड करने के बाद आता है। अपराधी अपने मोबाइल पर भी इस ऐप को रखते हैं। जैसे ही नंबर पता चलता है, वह अपने मोबाइल के ऐप में डालते हैं। इससे जिस किसी व्यक्ति को शिकार बनाया जाता है, उसके मोबाइल की स्क्रीन उन्हें दिखने लगती है। ऐप के माध्यम से मोबाइल को एक्सेस भी किया जा सकता है।
बता दें कि साइबर सेल में क्विक सपोर्ट ऐप से धोखाधड़ी के मामले पहले भी आते रहे हैं। साइबर सेल एक्सपर्ट बताते हैं कि क्विक सपोर्ट ऐप से मोबाइल को एक्सेस किया जा सकता है। इस ऐप को डाउनलोड कराने के बाद साइबर अपराधी एक नंबर पूछते हैं, यह नंबर ऐप डाउनलोड करने के बाद आता है। अपराधी अपने मोबाइल पर भी इस ऐप को रखते हैं। जैसे ही नंबर पता चलता है, वह अपने मोबाइल के ऐप में डालते हैं। इससे जिस किसी व्यक्ति को शिकार बनाया जाता है, उसके मोबाइल की स्क्रीन उन्हें दिखने लगती है। ऐप के माध्यम से मोबाइल को एक्सेस भी किया जा सकता है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
सावधानी बरतें
ऐप को जांच के बिना डाउनलोड करने से बचें। कोशिश करें कैश ऑन डिलीवरी पेमेंट करें। ऐप के बारे में जानकारी न होने पर अपने किसी संबंधित से पूछें। ठगी का पता चलने पर खाता तुरंत ब्लॉक करवाएं। ठगी होने पर सूचना नजदीकी पुलिस को दें। मोबाइल पर आने वाले लिंक को क्लिक न करें। साइबर क्राइम के बारे में दूसरे को भी जागरूक करें। अनजान शख्स से बैंक डिटेल साझा करने से बचें।
ऐप को जांच के बिना डाउनलोड करने से बचें। कोशिश करें कैश ऑन डिलीवरी पेमेंट करें। ऐप के बारे में जानकारी न होने पर अपने किसी संबंधित से पूछें। ठगी का पता चलने पर खाता तुरंत ब्लॉक करवाएं। ठगी होने पर सूचना नजदीकी पुलिस को दें। मोबाइल पर आने वाले लिंक को क्लिक न करें। साइबर क्राइम के बारे में दूसरे को भी जागरूक करें। अनजान शख्स से बैंक डिटेल साझा करने से बचें।