मैंने 20 साल पहले जो सपना देखा था आखिरकार वह पूरा हो गया। चंडीगढ़ से मुंबई तक का सफर 9 फीट लंबी साइकिल पर सवार होकर 40 दिन में मैंने पूरा किया। इस दौरान मैंने 5100 किलोमीटर का सफर तय किया। इस दौरान मैं कई शहरों से गुजरा। वहां के लोगों से मिलना हुआ। कुछ किमी. की दूरी के बाद ही भाषा बदल जाती।
अच्छी पहलः 40 दिन में 5100 किमी का सफर किया पूरा, अनूठी साइकिल से दें रहे गजब का संदेश
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जब किसी शहर से गुजरता तो वहां पर हर किसी की जुबान पर एक ही चर्चा होती कि कैसे यह शख्स इतनी लंबी साइकिल को बैलेंस बनाते हुए चला रहा है। रास्ते में मुझे अपने मोबाइल कैमरे में कैद करने की लोगों में होड़ लगी रहती थी। देश-दुनिया के लिए प्रदूषण एक विकराल समस्या बनता जा रहा है। इसके बावजूद दुनिया की तमाम सरकारें इस मुद्दे पर बिल्कुल भी गंभीर नजर नहीं आ रही हैं।
पर्यावरण प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पिछले कई सालों से लगातार प्रयास कर रहा हूं। वर्ष 1995 से साइकिल चलाने का यह सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक जारी है। अब अगला टारगेट गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराना है।
चंडीगढ़ से मुंबई तक का सफर काफी रोचक रहा। हर शहर का खाना, बोली और व्यवहार करने का तरीका अलग रहा। हालांकि लोगों ने हर जगह मुझे प्यार ही दिया। लेकिन गुजरात के लोगों की मेजबानी का तरीका सबसे अलग रहा। वहां के लोग मुझे और मेरी साइकिल को देखने के लिए काफी उत्सुक दिखे। इन लोगों में आईएएस अधिकारी, डॉक्टर और कारोबारी भी शामिल थे। उन्होंने मेरा सम्मान किया और मुझे अपने घर में ठहराया और खाना खिलाया। उनकी इस मेहमान नवाजी को ताउम्र नही भूलूंगा।
मुंबई पहुंचकर जब मैं फिल्म सिटी पहुंचा तो वहां पर ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ सीरियल के कलाकारों बाबू जी, टप्पू, जेठा लाल मिले। फिल्म सिटी में कॉमेडियन कपिल के शो के निर्देशक से मुलाकात हुई। उन्होंने शो में दर्शकों के बीच बैठने की मेरी व्यवस्था कराई। शो के दौरान कपिल शर्मा ने बॉलीवुड के गीतों और एक्टरों से जुड़ी बातें पूछीं। जिनका जवाब देने पर उन्होंने मुझे स्टेज पर बुलाया और गिफ्ट देकर सम्मनित किया।
पिछले बीस सालों से कद और काठी के हिसाब से साइकिल बदलती रही। इस बार पर्यावरण बचाओ अभियान के चलते ग्रो गीन नाम से साइकिल का रंग हरा बनाया। साइकिल को 9 फीट लंबा बनाया। इसकी सीट एक फीट और लंबी हो सकती है।
टूल किट भी साथ में रखा था। चंडीगढ़ से मुंबई यात्रा के दौरान गुड़गांव में साइकिल केएक्सल में प्रोब्लम आई थी। जिसे कुछ घंटे में दूर कर आगे का सफर शुरू किया। मैंने सफर के दौरान हर रोज 100 किलोमीटर साइकिल चलाई। वहीं सबसे अधिक एक दिन 142 किलोमीटर का सफर पूरा किया। कई वर्षों के अभ्यास के चलते मुझे इस साइकिल पर अब बैलेंस बनाने में कोई दिक्कत नहीं आती।
चंडीगढ़ से मुंबई तक के रास्ते में मेरे पीछे एक छोटी पिकअप वैन चलती थी। जिससे मेरा ड्राइवर चलता था। इसमें खाना बनाने का सामान, मेरे कपड़े और टेंट भी था। - राजीव कुमार ,जॉनी, सेक्टर 40 निवासी