कोरोना ने चंडीगढ़ के एक थियेटर कलाकार को सड़क पर ला दिया है। हालत यह है कि दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने के लिए यह कलाकार अब मजदूरी करने को मजबूर है। 18 साल से थियेटर कर रहे कलाकार अभिमन्यु ने बताया कि कोरोना की वजह से थियेटर का काम ठप पड़ा है। कुछ दिनों तक तो गुजारा चल गया लेकिन अब पेट की भूख मिटाने के लिए मजदूरी करने पड़ रही है। मां-बाप बीमार हैं।
पत्नी और एक छोटी बच्ची, जो अभी सिर्फ छह महीने की है। उनका भूख से बिलखता चेहरा नहीं देखा जाता। कई जगह काम ढूंढने की कोशिश की लेकिन काम नहीं मिलने पर अब भवन निर्माण में मजदूरी करनी पड़ रही हे। अभिमन्यु ने बताया कि मजदूरी करने के बाद उन्हें दिहाड़ी के तौर पर रोजाना 450 रुपये मिलते हैं।
कुछ दिन पहले नार्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला ने ऐसे कलाकारों की मदद की एक मुहिम शुरू की थी। इसमें तय किया गया था कि यदि कोई कलाकार किसी कहानी पर आधे घंटे की ऑडियो तैयार करता है तो उसे 1100 सौ रुपये से लेकर 2100 रुपये तक मिलेंगे लेकिन अभिमन्यु यह काम नहीं करना चाहते। वह कहते हैं कि मजबूरी में अपनी कला को सस्ते में नहीं बेचूंगा। कोरोना से पहले परफार्मेंस पर 50 हजार रुपये मिलते थे। अपनी मैं कला के प्रति बहुत स्वाभिमानी हूं। सस्ते में कला बेचने की बजाय मजदूरी करने का रास्ता चुना है।
चंडीगढ़ सेक्टर-25 में रहने वाले अभिमन्यु ने मास्क थियेटर नामक ग्रुप से अपना करिअर शुरू किया था। उसके बाद हिंदी व पंजाबी के तमाम ग्रुपों से जुड़ गए। वह कई सालों तक शहर के जाने-माने कलाकार जीएस चन्नी के सेवा ड्रामा रेपेट्ररी कंपनी से जुड़े रहे। उनके साथ अभिमन्यु ने देश के कई हिस्सों व बाहर जाकर परफार्मेंस दी है। राष्ट्रीय स्तर के अवार्ड समारोह में वह लगातार अपनी प्रस्तुति देते रहे हैं।
कई प्रस्तुतियों में तो वह लीड रोल में भी नजर आ चुके हैं। अभिमन्यु ने बताया कि कोरोना से पहले सब कुछ ठीक चल रहा था। अच्छी कमाई हो रही थी। कोरोना में कई दोस्तों व थियेटर से जुड़े आर्टिस्टों ने भी मदद की, मगर कब तक उनसे मांगा जाए। सरकार व इससे जुड़े लोगों को कोसते हुए कहा कि आज तक कलाकारों के लिए ऐसी कोई नीति नहीं बनी, जो मुश्किल वक्त पर उनकी मदद कर सके। अभिमन्यु की मां टीबी से पीड़ित हैं, जबकि उनके पिता को लंग्स की बीमारी है।