ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कराए गए महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ गए हैं। भगवान जगन्नाथ अब 15 दिनों तक आराम करेंगे। भगवान का जड़ी बूटियों, औषधियों से उपचार कराया जाएगा। इस दौरान भक्त उनके दर्शन नहीं कर सकेंगे। मंदिर परिसर में न तो आरती होगी, न घंटे घड़ियाल बजाए जाएंगे। यहां तक कि ऊंची आवाज में बोलना भी मना है।
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भगवान जगन्नाथ
- फोटो : अमर उजाला
सेक्टर 31 स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा को भक्तों ने भगवान को 108 घड़े के जल से स्नान कराया। उत्कल सांस्कृतिक संघ के महासचिव अरुण मलिक ने बताया कि अब मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। मंदिर के पुजारियों के अलावा भक्तों ने भी भगवान को स्नान कराया। सोमवार सुबह मंदिर में भगवान की पूजा अर्चना के बाद भगवान के विग्रह को बाहर निकालकर महास्नान कराया गया। इस दौरान इस्कॉन और श्री चैतन्य गौड़ीय मठ के संन्यासी और भक्त संकीर्तन करते रहे। भंडारे का आयोजन भी किया गया।
अरुण मलिक ने बताया कि अब भगवान को अन्न का प्रसाद नहीं चढ़ाया जाएगा। फलों में केले का प्रसाद भी वर्जित है। भगवान का उपचार जड़ी बूटियों, सोंठ, लौंग, इलाइची, काली मिर्च, पीपली से होगा। उन्होंने कहा कि मंदिर के पुजारी लक्ष्मी धर दास उनका इलाज करेंगे। मंदिर के गर्भ गृह में केवल पुजारी ही जाएंगे। अन्य कोई भी भक्त मंदिर में प्रवेश नहीं करेगा।
भीषण गर्मी के बाद भी ट्राइसिटी के अलावा बद्दी और डेराबस्सी से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। दो जुलाई को नेत्र उत्सव और तीन जुलाई को उभा यात्रा के बाद चार जुलाई को रथयात्रा निकाली जाएगी। देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर उत्कल सांस्कृतिक संघ के प्रधान और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च (एनआईटीटीटीआर) के डायरेक्टर प्रोफेसर एसएस पटनायक, संघ के वाइस चेयरमैन एसके भुइयां सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित हुए।
परंपरानुसार भगवान की बीमारी की जांच के लिए प्रतिदिन वैद्य (पुजारी) भगवान जगन्नाथ की देखभाल करते हैं। भगवान को प्रतिदिन शीतल लेप भी लगाया जाता है। भगवान जगन्नाथ को रात में सोने से पूर्व मीठा दूध भी निवेदित किया जाता है। भगवान के ठीक होने पर उस दिन जगन्नाथ यात्रा निकलती है।