फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Pics: इसे कहते हैं जिंदादिली, दोनों हाथ और एक पैर नहीं, पर बच्ची में जज्बा गजबा का

Wed, 31 Jan 2018 10:26 PM IST
रूबी सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
रूबी सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 31 Jan 2018 10:26 PM IST
विज्ञापन
brave daughter of indian, handicapped girl rehnuma success story
बहादुर बेटी रहनुमा
जिंदादिली सीखनी है तो इस बच्ची से सीखिए। जन्म से दोनों हाथ नहीं और एक पैर काम नहीं करता, पर हिम्मत नहीं छोड़ी और आज मिसाल बनकर दुनिया के सामने खड़ी है।
brave daughter of indian, handicapped girl rehnuma success story
बहादुर बेटी रहनुमा
कहते हैं तालीम नहीं दी जाती परिंदों को उड़ानों की...वो तो खुद ही समझ जाते हैं, ऊंचाई आसमां की। ऐसा ही जज्बा देखने को मिला चंडीगढ़ की रहनुमा में। रहनुमा के दोनों हाथ काम नहीं करते, पर उससे ज्यादा काम करते हैं उसके पैर। जिनसे रहनुमा ने वो कर दिखाया कि देखने वाले दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं।
brave daughter of indian, handicapped girl rehnuma success story
बहादुर बेटी रहनुमा
रहनुमा के लिए सोमवार का दिन बेहद खास था। मौका था टीएफटी द्वारा आयोजित नेशनल विंटर थियेटर फेस्टिवल का और रहनुमा को मिल रहा था अवार्ड। सेक्टर-23 स्थित बाल भवन में हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने उनको सम्मानित किया। वहीं रहनुमा को अवार्ड लेता देख उनके माता पिता की आंखों में आंसू आ गए। आएं भी क्यों न, रहनुमा ने छोटी सी उम्र में अपने हौंसले की उड़ान से सभी का दिल जो जीत लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
brave daughter of indian, handicapped girl rehnuma success story
बहादुर बेटी रहनुमा
रहनुमा बड़ी होकर कलेक्टर बनना चाहती है
दसवीं की छात्रा रहनुमा ने कभी खुद को लाचार महसूस नहीं किया। हाथ नहीं, पर कभी हिम्मत नहीं हारी और पढ़ने के साथ लिखना पांव से लिखना सीखा। महज तीन साल की उम्र में उन्होंने कोयले की सहायता से लिखने की शुरुआत की। इसके बाद चॉक से लिखना शुरू किया। धीरे-धीरे वह पेन से भी लिखने लगीं। अब वह गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल मौली जागरां कालोनी में दसवीं कक्षा में की छात्रा हैं। वह पढ़ाई के साथ ड्राइंग भी करती हैं।
विज्ञापन
brave daughter of indian, handicapped girl rehnuma success story
बहादुर बेटी रहनुमा
ड्राइंग से जीती है जीवन के हर पल को
रहनुमा अपने पैर से बेहद खूबसूरत ड्राइंग बनाती हैं। उन्हें ड्राइंग करना इतना पसंद है कि उनके पैशन को देखते हुए उनकी ड्राइंग टीचर पूनम राणा उनकी खासी मदद करती हैं। पूनम रहनुमा को अपनी स्कूटर से हर कंपीटीशन में लेकर जाती भी हैं। रहनुमा ने बताया कि उन्हें ड्राइंग के जरिए कुदरत की खूबसूरती को बयां करना बेहद पसंद है। वह ड्राइंग में ही आगे भविष्य बनाना चाहती हैं। रहनुमा ने बताया कि उनकी टीचर पूनम उन्हें बहुत गाइड करती हैं।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed