'इंसानियत नाम की चीज नहीं रह गई है। मेरा भाई मर रहा था, मैं चिल्ला रही थी और वो चला गया। वे लोग मेरे भाई को बचाने की बजाय सवाल पूछते रहे।'
आंखों के सामने अपने भाई को दम तोड़ते देखने वाली नीलम चौहान ने यह दर्द बयां किया। सेक्टर-20 निवासी नीलम चौहान ने डॉक्टरों को अपने भाई के मौत का जिम्मेदार ठहराया है। नीलम ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच-32) के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को लिखित में शिकायत देकर भाई का इलाज कर रहे डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने के चलते कार्रवाई करने को कहा है।
बता दें कि सेक्टर-20 निवासी नीलम चौहान ने अपने भाई को 21 जनवरी को जीएमसीएच-32 में भर्ती कराया था। उनका कहना है कि 22 जनवरी को उनके भाई की इलाज के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मौत हो गई। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को दी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि जब वह जीएमसीएच-32 में भाई को भर्ती कराने पहुंचीं तो वहां मौजूद डॉक्टर इलाज करने की जगह सवाल-जवाब करने में जुट गए।
उन्होंने जब डॉक्टरों को कुछ पुरानी रिपोर्ट दिखाई तो वे बोले कि जब इलाज पीजीआई में चल रहा है तो मरीज को वह वहां क्यों नहीं ले र्गइं। बार-बार गुजारिश पर भी डॉक्टरों ने उनकी नहीं सुनी और इलाज नहीं मिलने के चलते उनके भाई की मौत हो गई। शिकायत में नीलम ने कहा है कि इलाज में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की जाए। नीलम ने बताया कि 85 वर्षीय की उनकी बुजुर्ग मां व मेरे भाई की तीन बेटियां इस सदमे से बाहर नहीं निकल सकी हैं।
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जीएमसीएच 32
- फोटो : file photo
मरीजों की मदद के लिए बनाई गई कमेटी का अता-पता नहीं
बता दें कि चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2015 में एक कमेटी बनाई थी। कमेटी इस उद्देश्य से बनाई गई थी कि अगर इलाज के दौरान कोताही के चलते मरीज की मौत हो जाए तो ऐसे डॉक्टरों पर कमेटी दी गई शिकायत के आधार पर जांच कर कार्रवाई करेगी। विभागीय सूत्रों की मानें तो डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मरीजों की मौत होने जाने की कई शिकायतें आती रहती हैं लेकिन कमेटी की ओर से आज तक एक भी डॉक्टर पर कार्रवाई नहीं की गई।