बॉलीवुड का ये दिग्गज स्टार सभी फिल्म निर्माताओं से काफी नाराज है और हाल ही में उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर किया। पढ़ें स्पेशल इंटरव्यू।
क्रूर सिंह याद होगा आपको, जो हाथ की अंगुलियों को खास अंदाज में मचकाते यक्कू बोलते ही छोटे पर्दे के दर्शकों पर अपना असर छोड़ता था। दूरदर्शन का बहुचर्चित हुआ तिलस्मी सीरियल चंद्रकांता का ये क्रूर सिंह शनिवार को कुरुक्षेत्र में पहुंचे तो अपने खास अंदाज में भले कई बार कहने पर उसने यक्कू ना बोला, पर अंधेरे से प्रकाश की ओर जाने का रास्ता उन्होंने जरूर दिखाया।
क्रूर सिंह की भूमिका से छोटे पर्दे पर कई वर्षों तक छाये रहे अखिलेंद्र मिश्रा ने आमिर खान की फिल्म लगान में अर्जन, अजय देवगन की फिल्म लीजेंड ऑफ भगत सिंह में चंद्रशेखर आजाद, आमिर खान की फिल्म सरफरोश में मिर्ची सेठ, शाहरुख खान की वीर जारा से लेकर हाल ही में रिलीज हुई ऋतिक रोशन की फिल्म काबिल में कसाई की भूमिका से अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।
कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय लघु फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने के लिए पहुंचे अखिलेंद्र से अमर उजाला ने विशेष बातचीत की। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन के दौरान वे भले इंजीनियर बनना चाहते हों, लेकिन अभिनय की तकनीक ने उन्हें संजीदा एक्टर के रूप में स्थापित कर दिया। उनका मानना है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साधन ही नहीं, सीधे तौर पर सामाजिक सरोकार जुड़ा है।
अखिलेंद्र मिश्रा ने कहा कि तमसो मां ज्योर्तिगमय अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाने वाले विधा सिनेमा। मंदिर में जब जाते हैं तो गर्भगृह में पहले अंधेरा होता है, लेकिन वहां दर्शन प्रकाश के होते हैं। दर्शक जब सिनेमा देखने जाते हैं तो वहां पहले अंधेरा होता है और फिर उसे प्रकाश दिखता है। उन्होंने कहा कि अब अब भारतीय सिनेमा सरोकारों का सिनेमा नहीं, बल्कि धन संचय करने का माध्यम बन गया है।