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पूरे 150 साल बाद आज देखिए 'ब्लू मून', मिस कर गए तो जिंदगीभर पछताएंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 31 Jan 2018 01:34 AM IST
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Blue Moon
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31 जनवरी की रात धरती नीले चांद की गवाह बनेगी। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण आम नहीं बल्कि बेहद खास होने वाला है। वैज्ञानिक इसे ब्लू मून कहते हैं। ऐसा दुर्लभ संयोग करीब 150 साल बाद आया है।
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वहीं पुजारी आचार्य राममेहर शास्त्री ने बताया कि चंद्र ग्रहण का सूतक 31 जनवरी को सुबह 8 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगा। ग्रहण का स्पर्श 5 बजकर 18 मिनट शाम को होगा। यहां चंद्रोदय 5 बजकर 18 मिनट पर होगा वहीं चंद्र ग्रहण को इस समय देखा जा सकता है।
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चंद्रोदय का समय शाम छह बजकर एक मिनट पर है। पूर्ण चंद्र ग्रहण 6 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगा। चंद्र ग्रहण का मध्य काल 6 बजकर 50 मिनट पर होगा और ग्रहण का समाप्त 7 बजकर 37 मिनट पर होगा। ग्रहण का मोक्ष 8 बजकर 41 मिनट पर होगा। देश के पूर्वी एवं उत्तर-पूर्वी हिस्सों में चंद्र ग्रहण चंद्रोदय के तुरंत बाद देखने को मिलेगा।
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77 मिनट तक रहेगा पूर्ण चंद्रग्रहण
पूर्ण चंद्रग्रहण 77 मिनट तक रहेगा। ‘स्पेस.कॉम’ की खबर के अनुसार इस दौरान चंद्रमा का निचला हिस्सा ऊपरी हिस्से की तुलना में ज्यादा चमकीला दिखेगा। इस साल के बाद अगली बार नीला चांद 31 दिसंबर, 2028 को फिर 31 जनवरी, 2037 को दिखेगा। दोनों ही बार पूर्ण चंद्रग्रहण होगा।
पूर्ण चंद्रग्रहण 77 मिनट तक रहेगा। ‘स्पेस.कॉम’ की खबर के अनुसार इस दौरान चंद्रमा का निचला हिस्सा ऊपरी हिस्से की तुलना में ज्यादा चमकीला दिखेगा। इस साल के बाद अगली बार नीला चांद 31 दिसंबर, 2028 को फिर 31 जनवरी, 2037 को दिखेगा। दोनों ही बार पूर्ण चंद्रग्रहण होगा।
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चंद्र ग्रहण
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ग्रहण काल में इन बातों का रखें ध्यान
ग्रहण के समय अशुभ राशि वालों, रोगी एवं गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण नहीं देखना चाहिए। इस दौरान ईश्वर आराधना, मंत्र जाप, संकीर्तन आदि करने से लाभ मिलता है। पर्व काल के दौरान भोजन करना, भोजन पकाना, सोना नहीं चाहिए। ग्रहण प्रारंभ होने के पूर्व खाने-पीने की वस्तुएं, पके भोजन, दूध, दही, घी, मक्खन, अचार, पानी, आदि में कुश या तुलसी डाल देनी चाहिए। इससे ये खाद्य पदार्थ दूषित नहीं होते हैं। इस दौरान सब्जी काटना, सीना-पिरोना आदि से बचना चाहिए।
ग्रहण के समय अशुभ राशि वालों, रोगी एवं गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण नहीं देखना चाहिए। इस दौरान ईश्वर आराधना, मंत्र जाप, संकीर्तन आदि करने से लाभ मिलता है। पर्व काल के दौरान भोजन करना, भोजन पकाना, सोना नहीं चाहिए। ग्रहण प्रारंभ होने के पूर्व खाने-पीने की वस्तुएं, पके भोजन, दूध, दही, घी, मक्खन, अचार, पानी, आदि में कुश या तुलसी डाल देनी चाहिए। इससे ये खाद्य पदार्थ दूषित नहीं होते हैं। इस दौरान सब्जी काटना, सीना-पिरोना आदि से बचना चाहिए।