विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब सरकार ने मुलाजिमों को दिवाली का तोहफा दिया है। सरकार ने तमाम विभागों, सोसाइटी, निगमों, बोर्डों में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले करीब तीस हजार मुलाजिमों को रेगुलर करने का फैसला किया है। इसके साथ ही निजी एजेंसियों या ठेकेदारों द्वारा नियुक्त हजारों आउटसोर्सिंग मुलाजिमों को भी अपनाने का निर्णय लिया गया है।
दिवाली से पहले मुलाजिमों को सरकार का बड़ा तोहफा, जानिए अहम बातें
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वे अब राज्य सरकार के अधीन कॉन्ट्रैक्ट पर काम करेंगे। सीएम प्रकाश सिंह बादल की अगुवाई में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुलाजिमों को रेगुलर करने के प्रस्ताव को सोमवार को डिप्टी सीएम सुखबीर बादल की अगुवाई वाली कैबिनेट सब-कमेटी ने हरी झंडी दी थी।
इससे पहले भी अकाली-भाजपा सरकार ने 45 हजार कच्चे मुलाजिमों को रेगुलर किया था जबकि, कांग्रेस के कार्यकाल में कोई भी मुलाजिम रेगुलर नहीं हुआ था। प्रवक्ता ने कहा कि सीएम व डिप्टी सीएम की राय थी कि इन कच्चे मुलाजिमों का अनुभव व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। इसलिए इन्हें पक्का करने का फैसला किया गया।
ये मुलाजिम हैं शामिल - ठेके, एडहॉक, अस्थायी व वर्क चार्ज आधारित ग्रुप ए, बी, सी के वे सभी मुलाजिम रेगुलर किए जाएंगे जिनकी तीन साल की सेवा, शैक्षिक योग्यता, प्राथमिक नियुक्ति के समय निर्धारित आयु सीमा और पूरी प्रक्रिया के साथ भर्ती हुई होगी। इन मुलाजिमों की मौजूदा तनख्वाह ज्यों की त्यों रहेगी, अगले तीन साल के लिए ये अपनी आखिरी तनख्वाह के बराबर वेतन लेते रहेंगे।
ग्रुप डी के उन मुलाजिमों को भी पक्का करने का फैसला किया गया है जो प्राथमिक नियुक्ति के समय मानदंड पूरे करते हैं। ये भी तीन साल तक अपनी आखिरी तनख्वाह लेते रहे हैं। तीन साल बाद इनकी अपनी तनख्वाह या प्राथमिक वेतन में से जो भी ज्यादा होगा, दिया जाएगा। कैबिनेट ने ठेकेदारों द्वारा नियुक्त सभी मुलाजिमों को अपनाने को मंजूरी दी है। अब ये मुलाजिम सरकारी प्रबंध के अधीन आ जाएंगे। ठेके पर नियुक्त दूसरे मुलाजिमों की तरह लाभ प्राप्त करने लायक हो जाएंगे।