बेटी तुझे सलामः पैरों में रॉड, फिर भी जीता गोल्ड
एक हादसे में रीढ़ की हड्डी टूट गई। पैरों में रॉड डालनी पड़ी, लेकिन लड़की ने हिम्मत नहीं हारी, बल्कि रिंग में उतरी और मिसाल बन गई। तस्वीरों में पूरी कहानी।
बेटी तुझे सलामः पैरों में रॉड, फिर भी जीता गोल्ड
ये बहादुर लड़की है, हरियाणा के हिसार जिले के गांव बालसमंद की बॉक्सर छोटो लोरा। लोरा की 2002 में बस में चढ़ते वक्त गिरने से बस उसके शरीर के निचले हिस्से के ऊपर से गुजर गई जिससे उसकी रीढ़ टूट गई थी। टांगों में रॉड डालनी पड़ी। प्राइवेट पार्ट डैमेज होने की वजह से यूरिन बैग लगाया गया।
बेटी तुझे सलामः पैरों में रॉड, फिर भी जीता गोल्ड
इसे कुदरत का करिश्मा ही कहिए कि उसकी रीढ़ अपने आप ही जुड़ गई और लोरा का टूटा हुआ हौसला वापिस लौटा। लोरा ने धीरे-धीरे प्रेक्टिस शुरू की और 2004 में वह रिंग में उतरी। आज लोरा उस पॉजिशन पर है, जहां हर बॉक्सर उसके हौसले को सलाम करता है।
बेटी तुझे सलामः पैरों में रॉड, फिर भी जीता गोल्ड
एनआईएस से कोचिंग डिप्लोमा कर चुकी लोरा ने 2014 सीनियर वुमन नैशनल चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीतकर फिर वापसी की। नियमों के मुताबिक, नैशनल के मेडल विनर को भारतीय टीम के कोचिंग कैंप में जगह मिलती है। बॉक्सिंग इंडिया के अधिकारी लोरा को जल्द ही नैशनल कैंप के लिए बुलावा भेजने वाले हैं। उसका अगला टारगेट रियो-2016 ओलंपिक है।
बेटी तुझे सलामः पैरों में रॉड, फिर भी जीता गोल्ड
लोरा 2004 की सीनियर नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडलिस्ट हैं। 2005 में सीनियर नेशनल में गोल्ड जीता। कोरिया में सिल्वर जीत चुकी हैं। 2006 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीत चुकी हैं। 2006 में ही लोरा ने डेनमार्क में गोल्ड जीता। 2007 में नेशनल में और कनाडा में गोल्ड जीत चुकी हैं। 2008 में रशिया,तुर्की और हंगरी में गोल्ड जीत चुकी हैं।