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'दर्द कभी कम ही नहीं हुआ, एसिड अटैक के बाद अस्पताल में 3 दिन शवों के साथ सोना पड़ा'
Wed, 14 Jun 2017 10:14 AM IST
amarujala.com- Written by: भारत भूषण मित्तल Presented by: रिशु राज सिंह
amarujala.com- Written by: भारत भूषण मित्तल Presented by: रिशु राज सिंह
Updated Wed, 14 Jun 2017 10:14 AM IST
एसिड अटैक से पहले और बाद की तस्वीर
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'दर्द कभी कम ही नहीं हुआ और उपर से लोग मजाक उड़ाते थे, हालत ये थी कि अस्पताल में 3 दिन शवों के साथ सोना पड़ा' ये शब्द हैं एसिड अटैक पीड़िता अमनप्रीत की।
Bathinda Acid attack
एसिड अटैक पीड़िता अमनप्रीत की अब तक 38 सर्जरी हो चुकी है। इस पर 40 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। लेकिन फिर भी चेहरा अभी सही नहीं हुआ है। उसकी चार सर्जरी और होना हैं। ब्यूटी पार्लर से घर चला रही अमनप्रीत जब आइना देखती हैं तो रोने लगती हैं। वह कहती हैं, ग्राहक का काम तो मैं कर देती हूं, लेकिन शीशा मेरे सामने आता है तो पुरानी यादें ताजा हो जाती है और दिल भर आता है...
Bathinda Acid attack
31 जनवरी 2011 की उस मनहूस शाम की याद आते ही अमनप्रीत कौर सिहर उठती है। उस दिन शाम सात बजे वह अपनी मां के साथ ब्यूटी पार्लर बंद कर रिक्शे पर घर लौट रही थीं, तभी पीछे से किसी ने उसका नाम लेकर आवाज दी। वह पलटकर देखती, उससे पहले ही मंकी कैप डाले बाइक सवारों ने उसके सिर पर तेजाब डाल दिया।
इससे अमनप्रीत कौर के आंख, कान, नाक और चेहरा बुरी तरह झुलस गया। साथ बैठी मां का भी पेट के नीचे का हिस्सा तेजाब से जल गया। तेजाब उसके गले के अंदर तक चला गया, जिससे आवाज भी भरभरा गई। इस तरह दो मिनट के अंदर ही उनका सब कुछ उजड़ गया।
इससे अमनप्रीत कौर के आंख, कान, नाक और चेहरा बुरी तरह झुलस गया। साथ बैठी मां का भी पेट के नीचे का हिस्सा तेजाब से जल गया। तेजाब उसके गले के अंदर तक चला गया, जिससे आवाज भी भरभरा गई। इस तरह दो मिनट के अंदर ही उनका सब कुछ उजड़ गया।
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Bathinda Acid attack
अमनप्रीत कहती है कि आरोपी तो फरार हो गए, लेकिन वहां खड़े लोगों ने उनकी सहायता नहीं की। वे तमाशबीन बने रहे। 15-20 मिनट बाद पुलिस और एंबुलेंस को सूचित किया तब लोग उन्हें सिविल अस्पताल लेकर गए। हालत देख डाक्टरों ने उन्हें फरीदकोट रेफर किया, जहां से उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। पांच वर्ष पहले तेजाब हमले की इस घटना को याद कर ये मां बेटी आज भी दहशत में आ जाती है।
Bathinda Acid attack
अमनप्रीत के पिता कीर्तन सिंह ने बताया कि अब तक उनकी बेटी की कुल 38 सर्जरी हो चुकी हैं, जिस पर 40 लाख रुपये के करीब खर्च आ चुका है। अभी चार सर्जरी बाकी हैं। उन्होंने बताया कि सरकार और प्रशासन ने उनको पांच वर्षों तक धोखे में रखा। घटना के बाद प्रशासन ने उनकी सहायता तो क्या करनी थी, उल्टा सहायता के नाम पर उनका मजाक उड़ाया जाता रहा। घटना के बाद वह अपनी बेटी और पत्नी को उपचार के लिए पीजीआई चंडीगढ़ ले गए थे, जहां पर किसी ने उनकी नहीं सुनी और तीन दिन तक वह शवों के साथ सोते रहे।