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लॉकडाउन का एक साल : चंडीगढ़ का पहला हॉटस्पॉट बना था ये एरिया, बदनामी ऐसी... नाम सुनते ही नौकरी से निकाल दिए गए थे लोग
Fri, 26 Mar 2021 01:35 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 26 Mar 2021 01:35 PM IST
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बापूधाम चंडीगढ़ का पहला हॉटस्पॉट था।
- फोटो : फाइल फोटो
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चंडीगढ़ में जब कोरोना ने दस्तक दी तो बापूधाम पहला हॉटस्पॉट बना। इस नाम की यहां के लोगों ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई। जैसे-जैसे यहां केस बढ़े लोगों ने बापूधाम के खिलाफ नकारात्मक रवैया अपनाना शुरू कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि बहुत सारे लोगों की नौकरियां बापूधाम का नाम बताते ही चलीं गईं। लॉकडाउन के दौरान जो लोग बापूधाम में दूध, सब्जी, राशन की सप्लाई करने आते थे, उन्होंने भी वहां जाना बंद कर दिया। समय के साथ वहां के हालात जरूर बदले हों, लेकिन आज भी बापूधाम के लोगों के जख्म भरे नहीं हैं। लोगों का कहना है कि आज भी कई लोग बापूधाम और उनके लोगों को टारगेट करते हैं। बापूधाम में 24 अप्रैल 2020 को पहला केस सामने आया। यहां रहने वाले जीएमसीएच-32 के एक कर्मचारी के पॉजिटिव मिलने के बाद संक्रमित लोगों की एक चेन बनने लगी। किसी गली में छह तो किसी गली में 12 केस आने लगे। देखते ही देखते बापूधाम को पूरी तरह सील कर दिया गया। हालात यह हो गए कि यहां अर्द्धसैनिक बल लगाना पड़ा। 20 से अधिक पॉकेट पूरी तरह सील कर दिए गए। हर किसी में डर फैल गया।
चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
पूरा शहर बापूधाम के नाम से डरने लगा। इसका असर यह हुआ कि खाद्य पदार्थों की सप्लाई तक बंद हो गई। किसी को दूध नहीं मिला तो किसी को राशन। हालात खराब होते चले गए। बापूधाम सील हो गया तो यहां के लोग नौकरी तक पर नहीं जा पाए। कोई व्यक्ति नौकरी के लिए निकला भी तो कंपनी में पहुंचते ही उसे बापूधाम का नाम सुनते ही बाहर कर दिया गया। मुसीबतों के पहाड़ लगातार टूटे। लोगों के मुताबिक, प्रशासन ने उन्हें नौकरी दिलवाने का आश्वासन दिया था लेकिन आज तक उन्हें नौकरी नहीं मिली।
चंडीगढ़ का बापूधाम।
- फोटो : फाइल फोटो
नौकरियां आज तक नहीं मिलीं
कोरोना के चलते बापूधाम का इलाका ही बदनाम ही नहीं हुआ बल्कि शहरवासियों को यहां से घृणा ही हो गई। क्षेत्र को लगातार बदनाम किया गया। इससे लोगों की नौकरियां गईं। प्रशासन ने आश्वासन दिया लेकिन नौकरी लोगों को अब तक नहीं मिल पाईं। बिजली, पानी के बिल वसूले जा रहे हैं। अन्य खर्चे बढ़ गए हैं। बापूधाम के लोगों ने पीड़ा बहुत झेली है और आज भी झेल रहे हैं। -दिलीप शर्मा, पार्षद, वार्ड नंबर 19
कोरोना के चलते बापूधाम का इलाका ही बदनाम ही नहीं हुआ बल्कि शहरवासियों को यहां से घृणा ही हो गई। क्षेत्र को लगातार बदनाम किया गया। इससे लोगों की नौकरियां गईं। प्रशासन ने आश्वासन दिया लेकिन नौकरी लोगों को अब तक नहीं मिल पाईं। बिजली, पानी के बिल वसूले जा रहे हैं। अन्य खर्चे बढ़ गए हैं। बापूधाम के लोगों ने पीड़ा बहुत झेली है और आज भी झेल रहे हैं। -दिलीप शर्मा, पार्षद, वार्ड नंबर 19
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चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
लोगों का नजरिया बदलना चाहिए
कोरोना का मामला सेक्टर-32 से यहां पहुंचा लेकिन बापूधाम को बदनाम कर दिया गया। 20 से अधिक पॉकेट बंद कर दिए गए। चारों तरफ से इलाका सील कर दिया गया। राशन, दूध बंद हो गया लेकिन लोगों की मदद को हम आगे आए। यहां लोगों की नौकरियां गई थीं, जो आज तक नहीं मिलीं। आज हालात कुछ ठीक हैं लेकिन बापूधाम के लोगों को दूसरे नजरिए से देखा जाता है। यह नजरिया बदलना चाहिए। -राजकिशोर, निवासी बापूधाम
कोरोना का मामला सेक्टर-32 से यहां पहुंचा लेकिन बापूधाम को बदनाम कर दिया गया। 20 से अधिक पॉकेट बंद कर दिए गए। चारों तरफ से इलाका सील कर दिया गया। राशन, दूध बंद हो गया लेकिन लोगों की मदद को हम आगे आए। यहां लोगों की नौकरियां गई थीं, जो आज तक नहीं मिलीं। आज हालात कुछ ठीक हैं लेकिन बापूधाम के लोगों को दूसरे नजरिए से देखा जाता है। यह नजरिया बदलना चाहिए। -राजकिशोर, निवासी बापूधाम
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चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
बापूधाम को दोष न दें
कोरोना पूरी दुनिया में फैला। यहां भी लोग पॉजिटिव आए। इसमें किसी इलाके या बापूधाम का दोष नहीं है। जगह से नफरत नहीं की जानी चाहिए। लोगों को उस समय परेशानी हुई। राशन तक नहीं मिल पा रहा था। हमने इसके लिए प्रयास किए। लोगों को अपना नजरिया अब बदलना होगा। साथ ही यहां के जिन लोगों की नौकरियां गईं उन्हें नौकरी मिलनी चाहिए। -उपेंद्र मौर्य, निवासी बापूधाम
कोरोना पूरी दुनिया में फैला। यहां भी लोग पॉजिटिव आए। इसमें किसी इलाके या बापूधाम का दोष नहीं है। जगह से नफरत नहीं की जानी चाहिए। लोगों को उस समय परेशानी हुई। राशन तक नहीं मिल पा रहा था। हमने इसके लिए प्रयास किए। लोगों को अपना नजरिया अब बदलना होगा। साथ ही यहां के जिन लोगों की नौकरियां गईं उन्हें नौकरी मिलनी चाहिए। -उपेंद्र मौर्य, निवासी बापूधाम