{"_id":"58579cf04f1c1b0814e39139","slug":"bank-account-can-be-hacked-through-email-be-aware-about-transactions-and-read-warnings","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"ईमेल से भी हैक हो सकता है बैंक खाता, सावधान रहें और देख लें ये वार्निंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ईमेल से भी हैक हो सकता है बैंक खाता, सावधान रहें और देख लें ये वार्निंग
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 01 Jan 2017 09:57 AM IST
विज्ञापन
ऑनलाइन सिस्टम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्या आप जानते हैं कि ईमेल से भी बैंक अकाउंट हैक हो सकता है। इसलिए जब भी ट्रांजेक्शन हो तो सावधान हो जाएं। देख लिजिए जरूरी वार्निंग।
ऑनलाइन सिस्टम
जब भी अकाउंट से ट्रांजेक्शन हो, बैंक में जाकर पूछताछ करें। हो सकता है कि यह हैकरों का ‘सलामी अटैक’ हो। बाद में वह खाते से बड़ी निकासी कर ‘सुनामी’ भी ला सकते हैं। बता दें कि बीते कुछ साल पहले ग्रेबिट नामक एक वायरस ने कई कंपनियों की हजारों फाइलें और डाटा चुरा लिया था। हालांकि यह एक उदाहरण मात्र है। ऐसे ही न जाने कितने तरीके से सोशल मीडिया से लेकर बैंक अकाउंट और अन्य सूचनाओं पर हैकरों का हमला होता आ रहा है।
ऑनलाइन
- फोटो : demo pics
यूपी एसटीएफ के एएसपी, साइबर क्राइम डॉ. त्रिवेणी सिंह की मानें तो छोटी रकम की चोरी छिपे या धोखे से निकासी (सलामी अटैक) कर हैकर टेस्ट करते हैं। वह यह कंफर्म करते हैं कि अमुक खाते से वह जब चाहें रकम निकाल सकते हैं। इसके बाद वह भविष्य में किसी बड़े ट्रांजेक्शन को अंजाम देते हैं। यही वजह है कि छोटी से छोटी रकम की निकासी के बाद भी एक्सपर्ट उसकी छानबीन की सलाह देते हैं ताकि ग्राहक संतुष्ट हो जाए कि अमुक ट्रांजेक्शन सही मद में हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऑनलाइन सिस्टम
दरअसल, बीते दिनों लाखों डेबिट कार्डधारकों के डाटा लीक होने के बाद खुद बैंक भी उनको सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं। वहीं बैंक खुद भी ग्राहकों के डाटा को सुरक्षित रखने के लिए जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। हालांकि बैंक के सूत्रों के मुताबिक यह डाटा बैंक और ग्राहक के बीच की थर्ड पार्टी से लीक होने की संभावना जताई जा रही है। साइबर मामलों के जानकारों की मानें तो थर्ड पार्टी के साथ हाथ मिलाने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वहां ग्राहकों का डाटा सुरक्षित रहेगा।
विज्ञापन
ऑनलाइन सिस्टम
ऐसे होता है हमला- वायरस हमला आपके ईमेल पर होता है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट वर्ड की फाइल अटैच होती है। वायरस इमेज, ग्रीटिंग कार्ड या ऑडियो और वीडियो फाइलों के जरिये भी कंप्यूटर में वायरस आता है। इसको डाउनलोड करते ही वायरस सक्रिय हो जाता है और सारी सूचनाएं हैकरों तक पहुंचाना शुरू कर देता है। साइबर अटैक के तहत डेबिट और क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर, सीवीवी कोड या सोशल नेटवर्किंग साइट की हैकिंग की जाती है। इसके अलावा सीधे मदरबोर्ड पर अटैक कर फीड डाटा चोरी किया जाता है।