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उम्र 98 साल, 5 बेटे और 5 पोते फौज में, पोती पुलिस अफसर...ये हैं आजाद हिन्द फौज के जवान

Sun, 27 Jan 2019 02:27 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झज्जर(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झज्जर(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 27 Jan 2019 02:27 PM IST
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Azad Hind Fauj Sepoy Lalti Ram Bravery Story, Subhas Chandra Bose
स्वतंत्रता सेनानी लालती राम
उम्र 98 साल है। इनके 5 बेटे और 5 पोते फौज में हैं और पोती पुलिस अफसर बनकर देश सेवा कर रही है। ये हैं आजाद हिन्द फौज के जवान, जानिए इनके बारे में सब कुछ।
Azad Hind Fauj Sepoy Lalti Ram Bravery Story, Subhas Chandra Bose
स्वतंत्रता सेनानी लालती राम
70वें गणतंत्र दिवस पर पहली बार दिल्ली में राजपथ पर आजाद हिन्द फौज के जवान नजर आए। फौज के चार सैनिकों ने परेड में हिस्सा लिया। इनके नाम हैं, लालती राम, भागमल, हीरा सिंह और परमानंद यादव। इन सभी की उम्र 90 से 100 साल के बीच है। बता दें कि 1942 में भारत को अंग्रेज़ों से आजाद कराने के लिए सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज, इंडियन नेशनल आर्मी का गठन किया था।
Azad Hind Fauj Sepoy Lalti Ram Bravery Story, Subhas Chandra Bose
स्वतंत्रता सेनानी लालती राम
अब जानिए 98 वर्षीय लालती राम के बारे में, जो हरियाणा के झज्जर जिले से हैं। लालती राम का जन्म 1 जनवरी 1921 को हरियाणा के झज्जर जिले के बेरी क्षेत्र के गांव दुबलधन में हुआ था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की फौज में रहते हुए इन्होंने कई देशों में युद्ध किया। लालती राम इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) में साल 1941 में भर्ती हुए थे। आजादी की लड़ाई लड़ते हुए वे कुछ समय के लिए लापता हो गए।
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Azad Hind Fauj Sepoy Lalti Ram Bravery Story, Subhas Chandra Bose
स्वतंत्रता सेनानी लालती राम
करीब 5 साल बाद वे लौट आए और 1946 में शादी के बंधन में बंध गए। उनकी पत्नी का नाम चांद कौर है, जो आज 92 साल की हो चुकी हैं। लालती राम के 5 बेटे फौज में रहे। 9 पोतों में 5 इस समय फौज में हैं। वहीं एक पोती पुलिस अफसर बनकर देश सेवा कर रही है। आजाद हिन्द फौज में रहते हुए उन्होंने तीन मेडल जीते थे। वे अंबाला, सिंगापुर, हांगकांग, जापान, थाईलैंड और कोलकाता की जेल में भी रहे।
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स्वतंत्रता सेनानी लालती राम
लालती राम आजाद हिन्द फौज के उन बहादुर सिपाहियों में से हैं, जिनको ब्रिटिश सरकार ने ट्रेन में गुप्त तरीके से 16 अप्रैल 1946 को कोलकाता से दिल्ली भेजा था। तब उनके साथियों ने उन्हें व अन्य लोगों को इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के डिब्बों के ताले तोड़कर छुड़ा लिया था। स्वतंत्रता सेनानी लालती राम को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम दो बार, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द एक-एक बार सम्मानित कर चुके हैं।
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