गजब के हौंसले और संघर्ष की मिसाल, है ये पहलवान। 13 की उम्र में शादी हुई, 14 में दो बच्चे और आज बन गई हैं देश की जानी मानी रेसलर।
ये हैं रोहतक के महम की नीतू पहलवान। जो देश की या दुनिया की पहली ऐसी महिला रेसलर हैं, जिनका चयन दो बच्चों की मां होने के बाद जूनियर नेशनल चैंपियनशिप के लिए हुआ था। उन्हें सोमवार को सीमा सुरक्षा बल ने सब इंस्पेक्टर पद पर नियुक्ति का पत्र दे दिया। हालांकि इसके लिए कुछ दिन इंतजार करना होगा, क्योंकि सब इसंपेक्टर के लिए कक्षा 12 पास होना जरूरी है। उसने परीक्षा दी हुई है और रिजल्ट का इंतजार है।
नीतू बचपन से ही सपना है कि पहलवान बनूं और गोल्ड मेडल जीतूंगी। लेकिन 13 साल की उम्र में पिता ने विवाह कर दिया। 45 साल की उम्र के अधेड़ के साथ। पिता की भी मजबूरी थी। घर में खाने के लाले थे तो बेटी के हाथ पीले करने का खर्च कहां से लाते। नीतू ससुराल तो गई, लेकिन लौट आई। पिता ने सोचा बेमेल विवाह ही लौटने का कारण है। इसलिए महम के गांव बेड़वा के संजय के साथ दूसरी शादी कर दी।
15 वर्ष की उम्र में दो बच्चों की मां बन गई, बावजूद इसके नीतू ने अपने सपने को मरने नहीं दिया। पति संजय से वह अपने सपने साझा करती थी। इसके बाद संजय ने प्रोत्साहित किया। उसने 18 साल की उम्र में प्रैक्टिस शुरू कर दी। आज वह 20 साल की है और देश की जानी मानी रेसलर बन चुकी हैं। कई मेडल अपने नाम कर चुकी है। विदेशों में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है।
नीतू ने अपना सपना साकार करने के लिए बहुत मेहनत की। वह काली जैकेट पहनकर गर्मियों में 10-10 किलोमीटर दौड़ लगाती थी। ऐसा वह शरीर को मजबूत बनाने ओर सहनशक्ति बढ़ाने के लिए करती थी। पति संजय सुबह चार बजे उसे बाइक पर घर से 40 किलोमीटर दूर रोहतक के छोटूराम स्टेडियम लेकर पहुंचता। वहां वह सात बजे तक अभ्यास करती, फिर वह उसे लेकर लौटता। नीतू एक झटके में 15 किलो वजन तोड़ सकती है।