कभी साइकिल चलाकर 750 रुपये की सेलरी के लिए काम करने जाता था। आज चार चार कंपनियों का सीईओ है, दिलचस्प है इनके संघर्ष की कहानी।
ये कहानी है अजय शर्मा की, जो हिन्दी, इंग्लिश और पंजाबी भाषा में डीटीपी की नौकरी करने तीन साल तक साइकिल पर गए। पर मन में कुछ करने की चाहत थी तो एक कंपनी खड़ी की, जिसे अमेरिका की एक कंपनी ने 30 लाख में खरीद लिया था। अजय भी उसी कंपनी में काम करने लगा और वहां कुछ ऐसा किया कि वो आज लगभग 10 हजार स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देकर प्लेसमेंट भी दिलवा चुके हैं।
अजय ने 1997 में एक कंपनी से टाइपिस्ट से अपनी करियर की शुरुआत की थी और उस समय मात्र 750 रुपए ,सेलरी के रूप में मिलते थे। जीवन में कुछ बनने के लिए सन् 2000 तक नौकरी की और पार्ट टाइम जॉब की। उनके काम को देखते हुए एक MNC कंपनी ने जॉब ऑफर की लेकिन शर्मा ने जॉब का ऑफर ठुकरा दिया। शर्मा ने जॉब की बजाए कंपनी से काम मांगा और कॉन्ट्रेक्ट परट्राइडेंट ग्रुप की डिजाइनिंग का काम ले लिया।
अजय ने कॉन्ट्रेक्ट को पूरा करने के लिए अपने दोस्त यश अरोड़ा को अपने साथ ले लिया और दोनों ने मिलकर यह काम पूरा कर दिया। काम पूरा होने के बाद उसी कंपनी ने उन्हें साढ़े तीन लाख रुपए का एक और प्रोजेक्ट दिया। इसके बाद प्रोजेक्ट मिलते गए और काम आगे बढ़ता गया। यश आज भी उनके साथ काम करते है और इंटरनेशनल कंपनी के प्रोजेक्ट्स देखते हैं।
अजय ने 2002 में सेक्टर-34 में एक छोटे से कैबिन से अपने काम की शुरुआत की और उसके बाद अपनी टीम भी बनाई। उनकी कंपनी एनिमेशन और मल्टी मीडिया का काम करने लगी और काम के बल पर कंपनी की पहचान बनी और अमेरिका की एक कंपनी ने 30 लाख रुपए में खरीद लिया। अजय शर्मा ने इसी कंपनी में जीएम की नौकरी शुरू की और दो साल बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी।