हां यह सच है। पंजाब के गांव खटकड़कलां के हर घर में अभी भी शहीद-ए-आजम भगत सिंह रहते हैं। शहीद ने भले ही इस गांव में जन्म न लिया हो लेकिन फिर भी यहां हर दिल में वह धड़कते हैं। जहन में उनकी यादें हमेशा बनी रहें, इसके लिए लोगों ने घरों की छत और आंगन में शहीद की प्रतिमाएं लगा रखी हैं। खटकड़कलां में घुसते ही यह आभास होने लगता है कि पंजाब का यह छोटा सा गांव किस महान व्यक्तित्व से ताल्लुक रखता है।
ग्राउंड रिपोर्ट: खटकड़कलां... यहां हर घर में भगत सिंह बसते हैं, बच्चा-बच्चा मानता है हीरो, देखें तस्वीरें
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गांव के बुजुर्ग आज भी शहीद को उनकी मां विद्यावती की तरह भगतया कहकर ही पुकारते हैं। हर ग्रामीण को इस गांव का होने पर गर्व है। गांव में भगत सिंह का व्यक्तित्व अपने आपमें इतना प्रभावशाली बना हुआ है कि उनके नाम के सामने बड़े-बड़े व्यक्तित्व छोटे लगने लगते हैं। हालांकि पंजाब का यह गांव अब भगत सिंह का पुराना गांव नहीं रहा, यहां लोगों के छोटे-छोटे घर बड़ी बड़ी कोठियों में तब्दील हो गए हैं। हालांकि भगत सिंह का पैतृक घर परंपरागत घरों की तरह ही दिखता है। पुरानी और छोटी ईंटों के बने इस घर में दो पुरानी चारपाइयां और उनकी मां विद्यावती का बेहद खूबसूरत पलंग रखा हुआ है, जिस पर उसे बनाने वाले का नाम और गांव का नाम लिखा है।
एक कमरे में लकड़ी की दो अलमारियां और खेती-किसानी से जुड़ी हुई चीजें रखी हैं। घर के दूसरे हिस्से में भूसा इकट्ठा करने का जेलवा, बाल्टी और अन्य सामान रखा हुआ है। एक अन्य कमरे में फर्श पर बैठकर खाना खाने वाली डाइनिंग टेबल, कुछ बर्तन जिनमें परातें, थालियां, गिलास और चम्मच हैं। घर के एक आंगन में कुआं है। हालांकि अब कुएं को संरक्षित करने के लिए सरकार ने इसे बंद कर दिया है।
खास संदेश देती हैं प्रतिमाएं
गांव के घरों में स्थापित की गईं शहीद की प्रतिमाएं देश के युवाओं के लिए एक खास संदेश दे रही हैं। इन प्रतिमाओं में ग्रामीणों ने इंकलाब के साथ ही शहीद ए आजम के हाथों में किताब को दर्शाया है। गांव के लोगों का कहना है कि भगत सिंह साहित्य के धनी थे। आज के युवाओं को भी उनसे सबक लेकर किताबों को आत्मसात करना चाहिए।
गलियों में मिलती हैं शहीदों की पुस्तकें
गांव के लोगों में शहीदों के प्रति गजब का प्रेम है। इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि गलियों में बनी दुकानों पर शहीदों की किताबें मिलती हैं। इन दुकानों में भगत सिंह के अलावा राजगुरु, सुखदेव, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद और दूसरे क्रांतिकारियों से संबंधित पुस्तकें ग्रामीण रखते हैं। गांव के बाहर एक पुस्तक बिक्री केंद्र तक खोला गया है।
शहीद भगत सिंह देश के युवाओं को जिस दिशा की ओर ले जाना चाहते थे गांव के लोग उसी दिशा में काम कर रहे हैं। उनकी प्रतिमा के हाथों में इंकलाब के साथ ही किताब को दिखाया गया है, जिससे युवाओं में यह संदेश जा सके कि व्यक्तित्व विकास में ज्ञान का अहम स्थान होता है जिसकी प्राप्ति सिर्फ किताबों से ही संभव है। - मनजीत कौर बोला, सेवानिवृत्त शिक्षिका, खटकड़कलां