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करतारपुर साहिब से लाइव: पाकिस्तानी बोले- सिर्फ तार ने हमें बांट रखा है, वरना हैं तो हम एक ही
Mon, 11 Nov 2019 10:08 AM IST
खुशबू गोयल
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, करतारपुर साहिब
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, करतारपुर साहिब
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 11 Nov 2019 10:08 AM IST
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करतारपुर साहिब
- फोटो : अमर उजाला
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पाकिस्तानियों से मिलने और उनसे बात करने पर यह मालूम होता है कि वे भी भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती व अमन के पक्षधर हैं। पढ़ें करतारपुर साहिब से लाइव रिपोर्ट...
करतारपुर साहिब
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पाकिस्तानियों के हर अल्फाज में अपनापन महसूस होता है। उनकी इच्छा है कि दोनों देशों में अमन का वातावरण हो और दोनों देश शांत, समृद्ध और खुशहाल बनकर विश्व शक्ति के तौर पर उभरें। हर पाकिस्तानी पहला सवाल यही पूछता था कि आपको यहां पर आकर कैसा लगा। पाकिस्तानी पंजाबी और हिंदी खुलकर बोलते हैं तो ऐसा लगता कि जैसे हम अपने भारत में ही हैं। भारतीय सीमा का गेट पार करके जैसे ही पाकिस्तान की जमीन पर कदम रखते हैं तो ऐसा महसूस ही नहीं होता कि दूसरे वतन में आ गए हैं। कुछ पाकिस्तान रेंजर्स पंजाबी में जी आया नूं कहकर स्वागत करते हैं और कुछ अंग्रेजी में वेलकम जी।
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इमिग्रेशन चेक पोस्ट पर खड़ा पाकिस्तानी जवान फलक कहता है कि पाहजी दसो किद्दा दा लगेया पाकिस्तान... इमिग्रेशन चेक काउंटर पर हिजाब पहने बैठी युवती बोलने लगी कि तुसी खुश हो, किद्दा दा लग रेहा है....वापस आंदे होए दस के जाणा कि पाकिस्तान केहो जिहा लगेया। किसी भी श्रद्धालु को दिक्कत न आए, इसलिए चेक काउंटरों के आसपास अधिकारी भी घूम रहे थे। बार-बार श्रद्धालुओं से बात कर रहे थे। गुरुद्वारा साहिब के चार किलोमीटर का रास्ता पंजाब के रास्तों जैसा ही महसूस हो रहा था। आसपास धान की फसल कट चुकी थी, पराली खेतों में ही पड़ी हुई थी।
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करतारपुर साहिब
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कई खेतों में पराली साफ हो चुकी थी, हालांकि जमीन देखकर लग रहा था कि इसको आग नहीं लगाई गई है, जमीन को पुलाव से ठीक किया गया है। गुरुद्वारे के निकट मार्केट में बनी दुकानों पर बैठे युवक और मालिक खरीदारी व सामान बेचने की बात कर, दोनों मुल्कों के बीच प्यार व दोस्ती की बात भी करते हैं। मनी एक्सचेंज की दुकान पर बैठा युवक कहने लगता है कि पाहजी, इंडिया दे एक रुपये दे असी 1.90 पाकिस्तानी रुपये देणे ने। पैसे एक्सचेंज करने में युवक ने 10 मिनट लगा दिए। इस दौरान उसने कहा कि जे असी दोनों इक हो जाइये ना ता पासा ही पलट जावे। तुसी दसो पाकिस्तान चंगा नी ऐ...असी हैं तां भरा-भरा ने। साड्डी बोली इक है, खून दा रिश्ता है। इह तां सब कंटीले तार ने रोक रखेया ए, वर्ना प्यार तां बोहत है।
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गुरुद्वारा साहिब के भीतर भी पाकिस्तान के जितने अधिकारी व लोग मिले, उनकी जुबान में मिठास व अपनेपन का अहसास होता रहा। इमिग्रेशन चेक आउट की वापसी पर वहां बैठी लड़की ने तपाक से फिर पूछा कि कैसा लगा आपको पाकिस्तान.... यहां के लोग कैसे हैं। कोई कमी पेशी तो नहीं रही। जो लोग चेक पोस्ट से निकल रहे थे, पाक के अधिकारियों व कर्मचारियों की तारीफ कर रहे थे। चेक पोस्ट के बाहर खड़े भारतीय जत्थे के लोग आपस में बात करते रहे कि जो तार न हो तो क्या फर्क है। देखो हवा-पानी सब एक जैसा है। मौसम व खेतीबाड़ी से लेकर सब कुछ एक है। लगता ही नहीं कि यह पाकिस्तान की पंजाबी बोल रहे हैं, हमारी ही तो भाषा है। पाक से रुखसत लेते समय भी अधिकारी व जवान एक सुर में बोल रहे थे कि आप दोबारा जरूर आना, हम इंतजार करेंगे।