बीते दिनों दिल्ली में पकड़ी गई नकली सिक्कों की फैक्ट्री का मालिक और यह कारोबार करने वाले गिरोह का सरगना असल में एक कार डेकोरेटर था, जो इन दिनों जेल में है। दिल्ली के रोहिणी में नकली सिक्को के साथ पकड़े गए चरखी दादरी के एक कार डेकोरेशन संचालक आरोपी नरेश कुमार ने कई अहम खुलासे किए थे।
500-1000 के नोट बंद, नकली सिक्कों की असली सच्चाई भी सुन लीजिए
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पुलिस के मुताबिक चरखी दादरी निवासी नरेश कुमार ने सन 1999 में अपने घर में ही कार डेकोरेशन की दुकान खोली थी। इसके कुछ सालों बाद वहां कुछ और ऐसी ही दुकान खुल गईं। इस कारण दुकान से ज्यादा इनकम होनी बंद हो गई, इसलिए दुकान बेचकर वह परिवार समेत दिल्ली चला गया।
दिल्ली में नरेश ने झज्जर निवासी सोनू व राजू के साथ मिलकर नकली सिक्कों का कारोबार करना शुरू कर दिया। वह नकली सिक्के कमीशन लेकर सप्लाई का कार्य करता था। इन सिक्कों को वह टॉल प्लाजा, मॉल, चाय व पान की दुकान और शादी समारोह के लिए सप्लाई करता था। बीती 2 अक्तूबर को ही वह पकड़ा गया था।
ऐसे पहचानें नकली सिक्के: 10 रुपये के जिस सिक्के पर 10 तीली बनी हो वही सिक्का असली है, इस भ्रम में लोग 15 तीलियों की छाप वाला सिक्का लेने से कतरा रहे हैं। लोग 10 के उसी सिक्के का लेनदेन कर रहे हैं जिसमें रुपए का चिन्ह अंकित हो और 10 तीलियां बनी हो। जबकि 15 तीली वाले 10 के जिस सिक्के को नकली कहकर लेनदेन से इनकार किया जा रहा है, वह भी असली है। रिजर्व बैंक ने भी स्पष्ट किया है कि इसे लेने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
दरअसल, 15 तीली वाला 10 का सिक्का पहली ढलाई का है। बाद की ढलाई वाले सिक्कों के मुकाबले उसकी बनावट में थोड़ी भिन्नता है। इसके अलावा 10 के सिक्के की पहली ढलाई के बाद ही रुपए का चिह्न जारी हुआ। बाद के सिक्कों की ढलाई में इस चिह्न का इस्तेमाल किया गया। सुंदरता और सफाई के मामले में भी पहली ढलाई का सिक्का बाद के सिक्कों से कमतर है। इसी भ्रम में लोग 15 तीली वाले सिक्के को नकली मान बैठे हैं।