बरनाला के मध्यवर्गीय परिवार की युवती हरप्रीत कौर की 07 दिसंबर 2013 को शादी थी। शादी के दिन वह लुधियाना के सराभा नगर के लैक्मे सैलून पर शादी का जोड़ा व चूड़ा पहनकर तैयार होने गई थी कि दो बदमाश उस पर तेजाब फेंककर फरार हो गए।
घटना 7 दिसंबर 2013 की है, लेकिन चार साल बाद भी प्रशासन, बादल सरकार या तत्कालीन कैप्टन सरकार तेजाब पीड़िता मृतक हरप्रीत कौर के परिवार के जख्मों पर मरहम नहीं लगा सकी। मृतका हरप्रीत कौर की माता दविंदर कौर ने बताया कि 13 दिसंबर 2013 को शादी के दिन उस पर दो बदमाश तेजाब फेंककर भाग गए, जब वह शादी का जोड़ा पहनकर लुधियाना के लैक्मे सैलून पर शादी के मंडप पर बैठने के लिए सज रही थी।
घायल हरप्रीत कौर पर तेजाब फेंका तो उसे तुरंत डीएमसी लुधियाना में दाखिल करवाया गया, जहां उसका करीब एक सप्ताह इलाज चला। उसकी हालत गंभीर देखते हुए हरप्रीत कौर को मुंबई के एक बडे़ अस्पताल में रेफर किया गया। लेकिन 26 दिसंबर को हरप्रीत कौर की मुंबई के अस्पताल में मौत हो गई।
4 of 7
लुधियाना हरप्रीत एसिड अटैक केस
27 दिसंबर 2013 को हरप्रीत कौर की मौत हो जाने संबंधी उनको बता दिया गया और 28 दिसंबर 2013 को उनकी लड़की हरप्रीत कौर का शव बरनाला घर पहुंचा। सरकार ने परिवार के एक सरकार को नौकरी का वादा किया था। लेकिन सब धोखा ही साबित हो रहा है।
5 of 7
लुधियाना हरप्रीत एसिड अटैक केस
आत्मिक शांती के लिए भी पैसे नहीं
हरप्रीत की माता दविंदर कौर ने बताया कि उनके पति जसवंत सिंह अकसर बीमार रहते हैं। दूसरा बेटा अर्शदीप सिंह बेरोजगार है। वह नौकरी के लिए दर दर भटकी, लेकिन किसी को नौकरी नहीं दी गई। अब वह दो समय की रोटी के लिए भी मोहताज हैं। वह पानी पी-पीकर गुजारा करते हैं।