बेटी ने हाथ जोड़कर नमन किया, सेल्यूट किया और उसके बाद 1971 के युद्ध के हीरो बिग्रेडियर अपने अंतिम सफर पर चले, तस्वीरों में अंतिम विदाई।
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बिग्रेडियर नरिंदर सिंह संधू
1965 और 71 के युद्ध में पाकिस्तानियों को धूल चटाने वाले ब्रिगेडियर नरिंदर सिंह संधू का चंडीगढ़ में निधन हो गया और शनिवार को सेक्टर 25 के श्मशानघाट में उनका दाह संस्कार किया। सेना ने राजकीय सम्मान के साथ बंदूकों से सलामी देकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सेना के कई मौजूदा व सेवानिवृत्त अफसर और उनके परिजन वहां मौजूद रहे। वे काफी समय से कैंसर से पीड़ित थे।
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बिग्रेडियर नरिंदर सिंह संधू
सन् 1971 के भारत-पाक युद्ध में ब्रिगेडियर नरेंद्र सिंह संधू (सेवानिवृत्त) डेरा बाबा सेक्टर नानक में 10 डोगरा रेजिमेंट की कमान संभाल रहे थे। तभी एक इंटेलीजेंस इनपुट से भनक लगी कि पाकिस्तान इसी सेक्टर में बने एक पुल से अपनी टैंक रेजिमेंट को भारत में दाखिल कर इस पूरे सेक्टर पर कब्जा करने का प्लान कर चुका है। रात ढलते ही पाक की टैंक रेजिमेंट इस सेक्टर में दाखिल हो जाएगी।
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बिग्रेडियर नरिंदर सिंह संधू
ब्रिगेडियर संधू 1953 में फौज की तीसरी कैवरी में तैनात हुए थे और फिर उन्हें 10 डोगरा रेजिमेंट में ट्रांसफर कर दिया गया। 1986 में वे रिटायर हो गए थे। वह अपने पीछे एक बेटा और बेटी छोड़ गए हैं, जबकि उनके दामाद अलोक सिंह क्लेर फौज में लेफ्टिनेंट जनरल पद पर फिलहाल अंबाला में तैनात हैं।
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बिग्रेडियर नरिंदर सिंह संधू
1971 के युद्ध में कमांडिंग अफसर ब्रिगेडियर संधू ने तुरंत अपनी रणनीति के तहत उस पुल को ही उड़वा दिया, जो पुल भारत और पाकिस्तान को जोड़ रहा था। संधू के इस ऑपरेशन से पाकिस्तान की रणनीति फेल हो गई। इसके लिए उन्हें महावीर चक्र से नवाजा गया। जबकि बतौर सुपीरियर अफसर वे फौज में कई बार ‘मेंशंड इन डिस्पैचस’ भी रहे।