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1965 युद्ध: रामचंद्र की हुंकार से टैंक छोड़ भाग खड़ी हुई पाक सेना

Sat, 29 Aug 2015 01:34 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 29 Aug 2015 01:34 PM IST
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1965 युद्ध: रामचंद्र की हुंकार से टैंक छोड़ भाग खड़ी हुई पाक सेना

1965 indo pak war: memorable incident of indian victory

खेमकरण सेक्टर में टैंकों के साथ भारत की ओर बढ़ रही पाकिस्तान की सेना भारतीय सेना की रणनीति और रामचंद्र के हुंकार से टैंक छोड़ भाग खड़ी हुई। तस्वीरों में देखिए पूरी कहानी। रिपोर्ट: आशीष वर्मा, चंडीगढ़।


1965 युद्ध: रामचंद्र की हुंकार से टैंक छोड़ भाग खड़ी हुई पाक सेना

1965 indo pak war: memorable incident of indian victory

1965 के युद्ध में खेमकरण सेक्टर में पाकिस्तान ने सबसे बड़ा हमला बोला था। पाक की प्लानिंग थी कि खेमकरण पर कब्जा कर वहां अपना मोर्चा बनाकर व्यास और सतलुज नदी पर बने पुलों को ध्वस्त कर दिया जाए ताकि अमृतसर का इलाका भारत से कट जाए। इस रास्ते के सहारे पाक सैनिक दिल्ली पहुंचना चाहते थे, लेकिन भारतीय जवानों ने उन्हें वहीं पर ध्वस्त कर दिया। इस सेक्टर में पाकिस्तान की कमर तोड़ने वालों में चंडीगढ़ के एक आर्मी अफसर भी शामिल थे।

1965 युद्ध: रामचंद्र की हुंकार से टैंक छोड़ भाग खड़ी हुई पाक सेना

1965 indo pak war: memorable incident of indian victory

चंडीगढ़ के सेक्टर 34 डी में रहने वाले वीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल राम स्वरूप शर्मा ने शुक्रवार को अमर उजाला के साथ बातचीत में आठ और 21 सितंबर 1965 को हुए युद्ध के बारे में विस्तार से बताया। राम स्वरूप शर्मा उस समय राजपूताना राइफल्स में मेजर के पद पर तैनात थे। जब भारतीय सेना को जानकारी मिली कि खेमकरण सेक्टर में पाकिस्तान सेना कई टैंकों के साथ भारत की ओर बढ़ रही है तो उन्हें कंपनी के साथ भेजा गया।

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1965 युद्ध: रामचंद्र की हुंकार से टैंक छोड़ भाग खड़ी हुई पाक सेना

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उनकी कंपनी में सिर्फ 50 सैनिक थे। उन्होंने देखा कि पाकिस्तान ने पक्के बंकर बना रखे हैं और उनकी तादाद भी काफी ज्यादा है। राम स्वरूप ने बताया कि उनके और पाकिस्तानी टैंकों के बीच एक खेत था, जिसमें बाजरा की फसल थी। फसल काफी लंबी थी। मेजर शर्मा ने अपनी कंपनी के साथ रणनीति बनाई कि खेतों में वे दोनों तरफ से घुसेंगे और राम चंद्र जय के नारे लगाएंगे, ताकि पाक सेना को लगे कि सैकड़ों भारतीय सैनिक मौजूद हैं।

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फिर खेत के दोनों तरफ से सैनिक आगे बढ़े और राम चंद्र की जय के जयकारे लगाने लगे। उनके घुसने से खेतों में हलचल भी दिखने लगी। आवाज से पाकिस्तान की सेना घबरा गई और ताबड़तोड़ एमएमजी से फायरिंग शुरू कर दी। लेकिन पाक सेना की फायरिंग से भारतीय सैनिक घबराए नहीं और आगे बढ़ते हुए मुंहतोड़ जवाब देना शुरू कर दिया। पाकिस्तान के कई टैंक उन्होंने ध्वस्त कर दिए। खुद मेजर कर्नल राम स्वरूप शर्मा ने पाकिस्तान के दो टैंक ध्वस्त किए थे।

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