खूबसूरत घाटियों से होता हुआ कालका से शिमला जाने वाला हेरीटेज ट्रैक 114 साल का हो गया। इसका महात्मा गांधी से खास कनेक्शन है, पढ़ें वो राज जिन्हें जानता नहीं कोई।
102 पुल और चार मंजिला स्टोन आर्च पुल व मनमोहक घाटियों से गुजरने वाला कालका-शिमला रेलमार्ग आज 114 साल का हो गया। इस रेल मार्ग को 10 जुलाई 2008 को यूनेस्को ने विश्व धरोहर में शामिल किया था। इसकी शुरुआत 9 नवंबर 1903 को हुई थी। इसकी लंबाई लगभग 96 किलोमीटर है।
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विश्व धरोहर कालका-शिमला ट्रैक
- फोटो : अमर उजाला
खास बात ये कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस कालका-शिमला रेलमार्ग से 1921 में यात्रा की थी। समरहिल स्थित राजकुमारी अमृतकौर का घर भी महात्मा गांधी की शिमला यात्राओं का साक्षी है। वहीं यह ट्रैक सैलानियों को खास पसंद है, क्योंकि जब घुमावदार पहाड़ों के बीच से टॉय ट्रेन गुजरती है तो नजारा अद्भुत होता है।
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टॉय ट्रेन, कालका टू शिमला
- फोटो : file photo
हर साल हजारों सैलानी गर्मी के मौसम में इस रेल मार्ग से ही शिमला में ठंडक का आनंद लेने और सर्दियों में पहाड़ों में बिछी बर्फ की चादर का नजारा देखने जाते हैं। इन सैलानियों में देसी नहीं, बल्कि विदेशी भी होते हैं। बच्चों से लेकर नवदंपति भी होते हैं, जो हनीमून में इसका मजा जरूर लेते हैं।
रेल सूत्रों के अनुसार, इस रेलमार्ग पर सामान्य सीजन में लगभग डेढ़ हजार यात्री सफर करते हैं, जबकि पीक सीजन में यह आंकड़ा दोगुना हो जाता है। डीआरएम अंबाला दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि विश्व धरोहर में शामिल इस रेलमार्ग पर सुरक्षा और सुविधाओं को बढ़ाने के और प्रयास किए जाएंगे।