Indian Railways: भारतीय रेल से हर दिन लाखों लोग यात्रा करते हैं। भारतीय रेल से यात्रा करना सस्ता और आरामदायक है, जिसकी वजह से इसे देश की लाइफ लाइन कहा जाता है। भारतीय रेलवे दुनिया में चौथा और एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। भारत में रेलवे स्टेशन की कुल संख्या करीब 8000 है। आपने भी यात्रा करते समय सभी ट्रेन कोच के ऊपर लगे ढक्कन देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन्हें क्यों लगाया जाता है?
Indian Railways: क्यों ट्रेन की छत पर लगे होते हैं गोल ढक्कन? आखिर क्या होता है इनका काम
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ट्रेन में ज्यादा लोगों के यात्रा करने की वजह कोच खचाखच भरे होते हैं। कभी कभी तो सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यह रूफ वेंटिलेटर उमस और गर्मी को बाहर निकालते हैं।
यात्रा करते समय आपने ट्रेन में देखा होगा कि अंदर छत पर जालियां लगाई गई होती हैं। किसी कोच में जालियों के स्थान पर गोल-गोल छेद बने होते हैं। ट्रेन कोच के ऊपर लगी प्लेटों से यह जुड़ी होती हैं। इनके माध्यम से ट्रेन की गर्मी या हवा पास होती है। हमेशा गर्म हवाएं ऊपर की ओर उठती हैं।
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कोच के भीतर बने छेद या जाली से रूफ वेंटिलेटर के रास्ते गर्म हवाएं बाहर निकल जाती हैं। रूफ वेंटिलेटर के ऊपर से गोल या अन्य आकार की प्लेटे्स लगाई जाती हैं, जो दूर से देखन पर ढक्कन की तरह दिखाई देती हैं। इन प्लेट्स को रूफ वेंटिलेटर के माध्यम से गर्म हवा को ट्रेन कोच से बाहर निकालने के लिए लगाया जाता है।
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अब आपके मन में सवाव खड़ा हो रहा होगा कि ट्रेन के अंदर से उमस खिड़कियों से क्यों बाहर नहीं निकलती हैं? दरअसल उमस एक तरह की गर्म हवा होती है, जो ठंडी हवा से हल्की होती है। इसकी वजह से वह हमेशा ऊपर उठती है।