Wooden Satallite: जापान ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए दुनिया का पहला लकड़ी का सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज दिया है। हथेली के बराबर दिखने वाले इस सैटेलाइट का नाम लिग्नोसैट है। इस सैटेलाइट को पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन ले जाया जाएगा और फिर 400 किलोमीटर ऊंचाई वाली ऑर्बिट में छोड़ दिया जाएगा। इस लॉन्चिंग को स्पेसएक्स के रॉकेट के जरिए अंजाम दिया गया है।
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ISS की सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
लिग्नोसैट का निर्माण
लिग्नोसैट को होनोकी नाम के पेड़ की लकड़ी से बनाया गया है, जो मैग्नोलिया प्रजाति का पेड़ है। यह एक 10 महीने का प्रयोग है। पहले 10 महीने यह सैटेलाइट स्पेस स्टेशन में रहेगा और फिर इसे अंतरिक्ष में छोड़ दिया जाएगा। इसके बाद यह छह महीने तक ऑर्बिट में घूमता रहेगा। इस दौरान इसके इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों को ऑन करके चेक किया जाएगा। साथ ही, माइनस 100 से 100 डिग्री सेल्सियस तापमान की जांच की जाएगी।
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लकड़ी का सैटेलाइट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Freepik
लकड़ी का सैटेलाइट क्यों?
जापान इस प्रयोग के जरिए यह जानना चाहता है कि क्या लकड़ी से बना सैटेलाइट अंतरिक्ष के कठिन वातावरण में जीवित रह सकता है। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में चंद्रमा और मंगल जैसे ग्रहों पर इंसानों के लिए घर बनाने का सपना साकार हो सकता है। लकड़ी किसी भी धातु की तुलना में हल्की होती है, जिससे इसे अंतरिक्ष में ले जाना आसान होगा।
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लिग्नोसैट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Freepik
अंतरिक्ष में लकड़ी क्यों नहीं सड़ेगी?
आप सोच रहे होंगे कि अंतरिक्ष में जहां न ऑक्सीजन है, न हवा, न पानी, वहां लकड़ी कैसे सड़ेगी? क्योटो यूनिवर्सिटी के फॉरेस्ट साइंटिस्ट प्रोफेसर कोजी मुराता का कहना है कि 1900 के शुरुआती विमान लकड़ी के ही बनाए जाते थे, ऐसे में लकड़ी का सैटेलाइट बहुत कारगर साबित हो सकता है। खास बात यह है कि अंतरिक्ष में लकड़ी को सड़ाने के लिए न तो पानी है, न ही हवा और न ही आग, इसलिए यह लंबे समय तक टिकेगी।
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लकड़ी का सैटेलाइट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Freepik
जापान के एस्ट्रोनॉट ताकाओ दोई ने कहा कि अगर लिग्नोसैट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन और अंतरिक्ष के रेडिएशन को बर्दाश्त कर लेता है, तो भविष्य में अंतरिक्ष की दुनिया में लकड़ी के सैटेलाइट बहुत कारगर साबित हो सकते हैं। आपको बता दें कि नासा ने भी इस सैटेलाइट को बनाने में मदद की है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले 50 साल में चंद्रमा और मंगल ग्रह पर लकड़ी उगाने की भी तैयारी की जा सकती है।