फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

मुफ्त में नहीं मिला था देश को 'रविवार का साप्ताहिक अवकाश', कई सालों के आंदोलन के बाद हासिल हुई थी यह छुट्टी

Wed, 30 Sep 2020 07:35 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Wed, 30 Sep 2020 07:35 PM IST
विज्ञापन
how sunday became weekly holiday in india labour movement narayan meghaji lokhande
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

एक समय ऐसा था, जब हफ्ता ना ही सोमवार से शुरू होता था और ना ही रविवार से। आप हफ्ते की शुरूआत या अंत कहीं से भी कहीं पर भी मान सकते थे। क्योंकि कामकाजी लोगों को हर दिन काम करना होता था। किसी भी तरह की साप्ताहिक अवकाश की कोई व्यवस्था नहीं थी। हालांकि, आज के समय में हफ्ते में रविवार की छुट्टी तो सबसे कॉमन बात है ही, कई जगह तो अब वर्किंग वीक पांच दिनों का हो गया है। लेकिन क्या आपको यह बात पता है कि भारत में संडे की छुट्टी कब और क्यों मिलना शुरू हुई?

how sunday became weekly holiday in india labour movement narayan meghaji lokhande
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

इसके पीछे का इतिहास जानना बहुत जरूरी है। कई लोगों की कठिन लड़ाई और संघर्ष के बाद ही ऐसा संभव हो पाया है। रविवार के दिन लोग अपने घरों में बैठकर आराम फरमाते हैं। इसका पूरा श्रेय नारायण मेघाजी लोखंडे को जाता है। ब्रिटिश शासनकाल में लोगों को बहुत परेशान किया जाता था। उस समय किसी भी मजदूर को कोई छुट्टी नहीं मिलती थी और सप्ताह के सातों दिन सबको काम करना पड़ता था।

how sunday became weekly holiday in india labour movement narayan meghaji lokhande
नारायन मेघा जी लोखंडे - फोटो : सोशल मीडिया

उस समय नारायण मेघाजी लोखंडे श्रमिकों के नेता थे। श्रमिकों की हालत को देखते हुए उन्होंने ब्रिटिश सरकार को इस बारे में सूचित किया। इसके साथ ही हफ्ते में एक दिन छुट्टी देने की बात कही, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने उनके इस निवेदन को सिरे से खारिज कर दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
how sunday became weekly holiday in india labour movement narayan meghaji lokhande
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

लोखंडे जी को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। उन्होंने सभी श्रमिकों को अपने साथ लिया और इसका जमकर विरोध किया और सरकार की इस सख्ती के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। मजदूरों को उनका हक दिलवाने के लिए काफी कुछ किया। 'बॉम्बे हैंड्स एसोसिएशन' के जरिये लोखंडे जी ने 1881 में पहली बार कारखाने संबंधी अधिनियम में बदलावों की मांग रखी और इसे पूरा करवाने के लिए आंदोलन की शुरुआत हुई।

विज्ञापन
how sunday became weekly holiday in india labour movement narayan meghaji lokhande
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

मजदूरों की मांगों के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसमें ये चीजें शामिल थी -

  • मजदूरों के लिए रविवार के अवकाश हो।
  • भोजन करने के लिए काम के बीच में समय मिले।
  • काम के घंटे यानी शिफ्ट का एक समय निश्चित हो।
  • काम के समय दुर्घटना की स्थिति में कामगार को वेतन के साथ छुट्टी मिले।
  • दुर्घटना में मज़दूर की मौत की स्थिति में उसके आश्रितों को पेंशन मिले।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed